Class 12 Biology Chapter 1 Notes PDF (Sexual Reproduction in Flowering Plants) यहां उपलब्ध है।
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“🔥 Biology Class 12 – Complete Guide! 🔥” Chapter 01- पुष्पी पादपो में लैंगिक जनन PART-01 NOTES
- प्रजनन (Reproduction) – जीव अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया प्रजनन कहलाती है। यह प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने और जीवन चक्र जारी रखने के लिए आवश्यक है।
- प्रजनन का उद्देश्य – प्रजातियों को बनाए रखना, नए जीवन की शुरुआत करना और प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवों के अनुकूल बनने के लिए प्रजनन जरूरी है।
- प्रजनन के प्रकार – प्रजनन दो प्रकार का होता है: अलैंगिक और लैंगिक। अलैंगिक में एक माता से नए जीव बनते हैं, जबकि लैंगिक में दो युग्मक मिलकर नया जीव बनाते हैं।
- अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) – इसमें केवल एक माता जीव से नए जीव बनते हैं। यह प्रक्रिया सरल, तेज़ और कम ऊर्जा खर्च करके संख्या बढ़ाने का आसान तरीका है।
- लैंगिक प्रजनन (Sexual reproduction) – इसमें दो युग्मक (पुरुष और स्त्री) मिलकर जाइगोट बनाते हैं। यह आनुवंशिक विविधता बढ़ाता है और प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व में मदद करता है।
- अलैंगिक प्रजनन के लाभ – तेज़ और सरल होना, कम समय में अधिक संख्या बढ़ाना, ऊर्जा की बचत करना और नए जीवों का निर्माण करना अलैंगिक प्रजनन के मुख्य लाभ हैं।
- लैंगिक प्रजनन के लाभ – लैंगिक प्रजनन आनुवंशिक विविधता बढ़ाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता देता है और प्रजातियों को नई परिस्थितियों में अनुकूल बनने में मदद करता है।
- द्विखंडन (Binary Fission) – यह अलैंगिक प्रजनन का तरीका है। एककोशिकीय जीव अपनी कोशिका या शरीर को दो समान हिस्सों में विभाजित करता है। हर भाग स्वतंत्र जीव बन जाता है।
- द्विखंडन उदाहरण – Amoeba और Paramecium में द्विखंडन पाया जाता है। इसमें नई कोशिकाएँ माता जीव जैसी ही होती हैं और संख्या तेजी से बढ़ती है।
- कली बनना (Budding) – इसमें माता जीव की दीवार से छोटी कली निकलती है। कली धीरे-धीरे विकसित होकर स्वतंत्र जीव बनती है, जबकि माता जीव अपनी संरचना बनाए रखता है।
- कली बनना उदाहरण – हाइड्रा और यीस्ट में कली बनना देखा जाता है। यह प्रक्रिया नई पीढ़ी जल्दी उत्पन्न करती है और प्रजाति के विस्तार में मदद करती है।
- विखंडन (Fragmentation) – जीव का शरीर कई टुकड़ों में विभाजित होता है। हर टुकड़ा स्वतंत्र रूप से नया जीव बनाता है और प्रजातियों के फैलाव में सहायक होता है।
- विखंडन उदाहरण – Spirogyra और कुछ शैवाल में यह देखा जाता है। यह अलैंगिक प्रजनन का तेज़ और सरल तरीका है और संख्या बढ़ाता है।
- स्पोर निर्माण (Spore Formation) – कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखने के लिए विशेष कोशिकाएँ बनती हैं। अनुकूल परिस्थितियों में ये स्पोर नए जीव में विकसित हो जाते हैं।
- स्पोर उदाहरण – Rhizopus (कवक) में स्पोर बनते हैं। स्पोर में पोषण भंडारित होता है और यह जीवों की संख्या तेजी से बढ़ाने में मदद करता है।
- कायिक प्रजनन (Vegetative Propagation) – पौधे के अंग जैसे जड़, तना या पत्ती से नए पौधे बनते हैं। यह अलैंगिक प्रजनन का सरल और तेज़ तरीका है।
- कायिक प्रजनन उदाहरण – आलू का कंद, गाजर की जड़ और शतावरी में पाया जाता है। यह प्रक्रिया कम समय और ऊर्जा में नए पौधे उत्पन्न करती है।
- आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization) – पुरुष युग्मक स्त्री अंग में पहुँचकर अंडाणु से मिलता है। यह भ्रूण को सुरक्षित रखता है और प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है।
- बाह्य निषेचन (External Fertilization) – पुरुष और स्त्री युग्मक शरीर के बाहर मिलते हैं। यह मुख्यतः जलजीवों में होता है। उदाहरण: मछली और मेंढक।
- अंडज प्राणी (Oviparous) – इन प्राणियों में भ्रूण अंडे में विकसित होता है और जन्म बाहर होता है। नई पीढ़ी की संख्या अधिक होती है, लेकिन जीवित रहने का जोखिम भी अधिक होता है।
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PART-02 NOTES
- जरायुज प्राणी (Viviparous) – इसमें भ्रूण माँ के गर्भ में विकसित होता है और जन्म वहीं होता है। उदाहरण: मनुष्य, बिल्ली। यह भ्रूण को सुरक्षित रखता है और छोटे संख्या में, लेकिन मजबूत संतानों का निर्माण करता है।
- युग्मक (Gamete) – लैंगिक प्रजनन में विशेष कोशिकाएँ होती हैं। पुरुष युग्मक और स्त्री युग्मक मिलकर जाइगोट बनाते हैं। युग्मक आनुवंशिक विशेषताओं को अगली पीढ़ी तक ले जाते हैं।
- जाइगोट (Zygote) – पुरुष और स्त्री युग्मक के मिलन से बनती है। यह नए जीव की पहली कोशिका है और विभाजित होकर भ्रूण और बाद में नया जीव बनाती है।
- भ्रूण (Embryo) – जाइगोट का विकसित रूप। यह नए जीव का प्रारंभिक रूप है और धीरे-धीरे सभी अंग और संरचना विकसित करता है। भ्रूण विकास प्रजाति के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
- बीजकला (Carpel / Pistil) – यह स्त्री पुष्प अंग है। इसमें स्तिग्मा, शैली और अंडाशय होते हैं। बीजकला परागकण ग्रहण कर निषेचन में मदद करती है और बीज का निर्माण सुनिश्चित करती है।
- अंडाशय (Ovary) – बीजकला का हिस्सा। इसमें अंडाणु बनते हैं। निषेचन के बाद अंडाणु भ्रूण में बदलता है और बीज का निर्माण होता है।
- स्तिग्मा (Stigma) – बीजकला का शीर्ष भाग। यह परागकण को पकड़ता है और शैली के माध्यम से अंडाशय तक पहुँचाता है।
- शैली (Style) – बीजकला का मध्य भाग। यह स्तिग्मा से अंडाशय तक परागकण को पहुंचाने का मार्ग प्रदान करता है।
- परागकोष (Anther) – पुरुष पुष्प अंग। इसमें परागकण बनते हैं, जो पुरुष युग्मक कोशिकाएँ होती हैं। परागकण पौधों में लैंगिक प्रजनन सुनिश्चित करते हैं।
- परागकोष और परागकण का महत्व – परागकण स्त्री अंग तक पहुँचकर निषेचन करते हैं। यह बीज और नए पौधे के निर्माण के लिए अनिवार्य है।
- स्व–परागण (Self-Pollination) – परागकण उसी फूल के अंडाणु से मिलता है। यह आनुवंशिक विविधता कम करता है लेकिन कम ऊर्जा में निषेचन सुनिश्चित करता है।
- क्रॉस–परागण (Cross-Pollination) – परागकण दूसरे फूल के अंडाणु से मिलता है। इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है और पौधे नई परिस्थितियों में अनुकूल बनते हैं।
- परागण के प्रकार – स्व-परागण और क्रॉस-परागण मुख्य प्रकार हैं। क्रॉस-परागण में कीट, हवा या पानी मदद करते हैं।
- निषेचन (Fertilization) – पुरुष और स्त्री युग्मक के मिलन से जाइगोट बनती है। यह नए जीव का निर्माण शुरू करता है और आनुवंशिक विशेषताओं को अगली पीढ़ी में ले जाता है।
- अंडाणु (Ovule) – स्त्री युग्मक। निषेचन के बाद यह भ्रूण में विकसित होता है और बीज का निर्माण करता है।
- परिपक्व अंडाणु (Mature Ovule) – यह निषेचन के लिए तैयार अंडाणु है। यह बीज और नए पौधे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- बीज (Seed) – निषेचन के बाद विकसित भ्रूण, कोषावरण और बीजकोष का संयोजन बीज कहलाता है। यह नए पौधे का स्रोत और जीवन चक्र का मुख्य अंग है।
- बीज का कोषावरण (Endosperm) – बीज में पोषण का भंडार। भ्रूण को अंकुरण और प्रारंभिक वृद्धि में ऊर्जा और आवश्यक पोषक तत्व देता है।
- बीजकोष (Seed Coat) – बीज की बाहरी परत। यह बीज को सूखने, कीट और बाहरी नुकसान से बचाता है।
- अंकुरण (Germination) – बीज से नया पौधा विकसित होने की प्रक्रिया। इसमें पानी, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान जरूरी हैं। जड़ पहले निकलती है, फिर अंकुर और पत्तियाँ विकसित होती हैं।
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PART-03 NOTES
- अंकुरण के लिए आवश्यक कारक – बीज के अंकुरण के लिए पानी, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान आवश्यक हैं। पानी बीज को फुलाता है, ऑक्सीजन ऊर्जा उत्पादन में मदद करती है और तापमान भ्रूण की कोशिकाओं को सक्रिय करता है। ये सभी कारक अंकुरण की सफलता और नए पौधे के विकास के लिए जरूरी हैं।
- अंकुरण में जड़ का विकास – अंकुरण की प्रक्रिया में सबसे पहले जड़ बाहर निकलती है। जड़ मिट्टी में प्रवेश कर पानी और पोषक तत्व अवशोषित करती है, जिससे नया पौधा मजबूत और सुरक्षित रूप से बढ़ता है। जड़ का विकास पौधे के जीवन के लिए अनिवार्य है।
- अंकुरण में अंकुर का विकास – जड़ के बाद अंकुर ऊपर निकलता है। यह प्रकाश संश्लेषण शुरू करने के लिए पत्तियाँ विकसित करता है। अंकुर का सही विकास पौधे की स्थिरता और वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होता है।
- अलैंगिक प्रजनन की गति – अलैंगिक प्रजनन तेज़ होता है क्योंकि इसमें केवल एक माता जीव से नई पीढ़ी उत्पन्न होती है और जटिल प्रक्रिया नहीं होती। यह जीवों को कम समय में संख्या बढ़ाने की क्षमता देता है।
- लैंगिक प्रजनन में समय की आवश्यकता – लैंगिक प्रजनन में दो युग्मक मिलकर जाइगोट बनाते हैं और भ्रूण विकसित होता है। इसमें समय अधिक लगता है लेकिन नई पीढ़ी में आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित होती है।
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Variation) – लैंगिक प्रजनन से माता और पिता की विशेषताएँ मिश्रित होती हैं। इससे नई पीढ़ी में आनुवंशिक विविधता आती है और प्रजातियाँ अनुकूल परिस्थितियों में बेहतर ढंग से जीवित रह सकती हैं।
- प्राकृतिक चयन (Natural Selection) – आनुवंशिक विविधता के कारण नए जीव पर्यावरण के अनुसार अनुकूल बनते हैं। यह प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व और विकास में मदद करता है।
- अलैंगिक प्रजनन में समानता – अलैंगिक प्रजनन में नई पीढ़ी माता जीव जैसी होती है। इसमें आनुवंशिक बदलाव बहुत कम होते हैं, इसलिए सभी नई पीढ़ियाँ समान गुणधर्म रखती हैं।
- कली बनना और मातृ जीव – कली बनते समय माता जीव सुरक्षित रहता है और केवल कली विकसित होकर स्वतंत्र जीव बनती है। यह प्रक्रिया ऊर्जा की दृष्टि से कुशल और तेज़ प्रजनन का तरीका है।
- विखंडन और कठिन परिस्थितियाँ – विखंडन में शरीर के टुकड़े स्वतंत्र रूप से नए जीव में बदल जाते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी यह प्रक्रिया जीवों को जीवित रखने और संख्या बढ़ाने में मदद करती है।
- स्पोर का पोषण – स्पोर में पोषण भंडारित रहता है। यह कठिन परिस्थितियों में जीवों की संख्या बढ़ाने और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव विकसित करने में मदद करता है।
- स्पोर का प्रसार – स्पोर हवा, पानी या जीवाणुओं के माध्यम से फैलते हैं। यह प्रजातियों के वितरण क्षेत्र को बढ़ाता है और नई जगहों पर जीवों के जीवन की संभावना बनाता है।
- कायिक प्रजनन में अंगों की भूमिका – जड़, तना और पत्ती से नए पौधे बनते हैं। ये अंग माता पौधे की संरचना बनाए रखते हैं और ऊर्जा कम खर्च करके नए पौधे उत्पन्न करते हैं।
- कायिक प्रजनन का लाभ – कम समय में अधिक संख्या, कम ऊर्जा की आवश्यकता और तेज़ परिणाम। यह खेती और वनस्पति प्रजनन में विशेष रूप से उपयोगी है।
- आंतरिक निषेचन का लाभ – पुरुष युग्मक सीधे स्त्री अंग में पहुँचता है और अंडाणु से मिलता है। भ्रूण सुरक्षित रहता है और बाहरी हानिकारक परिस्थितियों से सुरक्षित रहता है।
- बाह्य निषेचन का लाभ – अधिक संख्या में युग्मक और अंडाणु उत्पन्न होते हैं, जिससे जीवित रहने की संभावना बढ़ती है। यह मुख्यतः जलजीवों में देखा जाता है।
- अंडज और जरायुज में अंतर – अंडज में भ्रूण अंडे में विकसित होता है, जन्म बाहर होता है और संख्या अधिक होती है। जरायुज में भ्रूण गर्भ में विकसित होता है और सुरक्षित जन्म होता है।
- युग्मक का विकास – पुरुष और स्त्री युग्मक विशेष कोशिकाओं से विकसित होते हैं। ये लैंगिक प्रजनन में मिलकर नया जीव बनाते हैं और आनुवंशिक विशेषताएँ अगली पीढ़ी तक ले जाते हैं।
- जाइगोट का महत्व – जाइगोट नए जीव की पहली कोशिका है। यह विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करती है और प्रजातियों के अस्तित्व और विकास में मुख्य भूमिका निभाती है।
- भ्रूण की संरचना – भ्रूण में भविष्य के सभी अंगों की कोशिकाएँ विकसित होती हैं। यह पौधे या प्राणी के जीवन चक्र और नए जीव के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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PART-04 NOTES
- परागण में कीटों की भूमिका – कीट जैसे मधुमक्खी, तितली और बगुले परागकण को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाते हैं। यह क्रॉस-परागण में मदद करता है, जिससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है और पौधे नई परिस्थितियों में अनुकूल बन सकते हैं।
- परागण में हवा की भूमिका – कुछ पौधों में परागकण हवा के माध्यम से फैलते हैं। जैसे गेहूं, धान। हवा परागकण को दूसरे फूल तक पहुँचाकर क्रॉस-परागण को संभव बनाती है।
- परागण में पानी की भूमिका – जलज पौधों में परागकण पानी के माध्यम से अंडाणु तक पहुँचते हैं। यह बाहरी निषेचन को सक्षम बनाता है और नए पौधों के विकास में मदद करता है।
- स्व–परागण के फायदे – स्व-परागण में परागकण उसी फूल के अंडाणु तक पहुँचते हैं। यह कम ऊर्जा में निषेचन सुनिश्चित करता है, लेकिन आनुवंशिक विविधता कम होती है।
- क्रॉस–परागण के फायदे – अलग-अलग पौधों के परागकण मिलने से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। यह नई परिस्थितियों में पौधों के जीवित रहने और अनुकूलन में मदद करता है।
- अंडाणु और परागकण की संरचना – अंडाणु स्त्री युग्मक है, परागकण पुरुष युग्मक। निषेचन के समय ये मिलकर जाइगोट बनाते हैं। दोनों की संरचना जीव की नई पीढ़ी के लिए अनिवार्य है।
- जाइगोट से भ्रूण तक विकास – निषेचन के बाद जाइगोट विभाजित होकर भ्रूण बनता है। भ्रूण धीरे-धीरे सभी अंग विकसित करता है और बीज में सुरक्षित रहता है।
- भ्रूण के अंगों का विकास – भ्रूण में जड़, तना और पत्तियाँ धीरे-धीरे विकसित होती हैं। यह नए पौधे की संरचना और वृद्धि के लिए मुख्य आधार है।
- बीज के प्रकार – बीज एक कोष्ठक में भ्रूण और कोषावरण के साथ विकसित होते हैं। ये मूल रूप से दो प्रकार के होते हैं: एकबीज और द्विबीज, जो पौधे की प्रकृति पर निर्भर करता है।
- बीज के भाग – बीज में मुख्य भाग हैं: भ्रूण, कोषावरण और बीजकोष। भ्रूण नया पौधा बनाता है, कोषावरण पोषण देता है और बीजकोष सुरक्षा प्रदान करता है।
- बीज का कोषावरण – बीज में पोषण का भंडार होता है। यह भ्रूण को अंकुरण और प्रारंभिक विकास के दौरान आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करता है।
- बीजकोष की भूमिका – यह बीज की बाहरी परत है। बीजकोष सूखने, कीट और बाहरी नुकसान से बीज को सुरक्षित रखता है।
- अंकुरण की प्रक्रिया – बीज पानी अवशोषित करता है और फुलता है। जड़ पहले बाहर निकलती है, फिर अंकुर और पत्तियाँ विकसित होती हैं। यह नया पौधा बनने की प्रक्रिया है।
- अंकुरण में तापमान का महत्व – उपयुक्त तापमान बीज की कोशिकाओं को सक्रिय करता है और विभाजन बढ़ाता है। बहुत ठंडा या गर्म वातावरण अंकुरण में बाधा डाल सकता है।
- अंकुरण में ऑक्सीजन का महत्व – ऑक्सीजन कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है। बिना पर्याप्त ऑक्सीजन के बीज का अंकुरण और विकास धीमा या असंभव हो सकता है।
- अंकुरण में पानी का महत्व – पानी बीज को फुलाता है और कोषावरण से भ्रूण तक पोषक तत्व पहुँचाता है। बिना पानी के बीज अंकुरित नहीं हो सकता।
- बीज के अंकुरण में जड़ का महत्व – जड़ मिट्टी में प्रवेश कर पानी और पोषक तत्व अवशोषित करती है। यह पौधे को स्थिरता और भोजन प्राप्त करने में सहायता करती है।
- अंकुर में अंकुर का महत्व – अंकुर ऊपर निकलता है और पत्तियाँ विकसित करता है। यह पौधे को प्रकाश संश्लेषण शुरू करने और वृद्धि के लिए आवश्यक है।
- अलैंगिक प्रजनन में समय की बचत – अलैंगिक प्रजनन में नई पीढ़ी जल्दी बनती है, क्योंकि इसमें दो युग्मक की आवश्यकता नहीं होती और विभाजन प्रक्रिया सरल होती है।
- लैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक लाभ – लैंगिक प्रजनन नई पीढ़ी में माता और पिता दोनों की विशेषताएँ मिश्रित करता है। इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है और प्रजातियों के जीवन की संभावना बढ़ती है।
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PART-05 NOTES
- फूल का महत्व प्रजनन में – फूल पौधों का लैंगिक प्रजनन अंग है। इसमें नर और मादा अंग मौजूद होते हैं। फूल परागकण और अंडाणु का उत्पादन करता है और नए पौधे के निर्माण में भूमिका निभाता है।
- नर पुष्प अंग (Stamen) – नर पुष्प अंग में परागकोष और धातु (filament) होता है। परागकोष में परागकण बनते हैं, जो पुरुष युग्मक हैं और निषेचन के लिए आवश्यक हैं।
- स्त्री पुष्प अंग (Carpel/Pistil) – स्त्री अंग में स्तिग्मा, शैली और अंडाशय होता है। यह अंडाणु का निर्माण करता है और निषेचन के बाद बीज विकसित करने में मदद करता है।
- परागकण का विकास – परागकोष में परागकण विकसित होते हैं। प्रत्येक परागकण में पुरुष युग्मक कोशिका होती है, जो निषेचन के दौरान अंडाणु से मिलती है।
- परागण के माध्यम – परागण की प्रक्रिया में हवा, कीट, पानी और जानवर मुख्य भूमिका निभाते हैं। ये परागकण को स्त्री अंग तक पहुँचाकर निषेचन सुनिश्चित करते हैं।
- अंडाणु का विकास – अंडाशय में अंडाणु तैयार होते हैं। निषेचन के बाद यह भ्रूण में विकसित होता है और बीज के निर्माण की शुरुआत करता है।
- बीज के अंकुरण की स्थिति – बीज का अंकुरण उचित मिट्टी, नमी और तापमान पर निर्भर करता है। अनुकूल स्थिति में ही बीज स्वस्थ और मजबूत पौधे में विकसित होता है।
- जाइगोट और विभाजन – निषेचन के बाद बनता है जाइगोट। यह विभाजित होकर भ्रूण बनाता है और धीरे-धीरे सभी अंग विकसित होते हैं। यह नए जीव का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
- भ्रूण का विकास क्रम – भ्रूण में पहले जड़, फिर तना और पत्तियाँ विकसित होती हैं। यह क्रम पौधे के जीवन और स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
- अंडज प्राणी का जीवन चक्र – अंडज प्राणी अंडे में भ्रूण विकसित करते हैं। जन्म के बाद नए जीव स्वतंत्र रहते हैं। उदाहरण: मछली और मेंढक।
- जरायुज प्राणी का जीवन चक्र – जरायुज प्राणी गर्भ में भ्रूण विकसित करते हैं। जन्म सुरक्षित होता है और छोटे संख्या में मजबूत संतानों का निर्माण होता है। उदाहरण: मनुष्य, कुत्ता।
- अंडज और जरायुज का तुलना – अंडज में अधिक संख्या, बाहरी विकास, जोखिम अधिक। जरायुज में सुरक्षित गर्भ, कम संख्या, विकास अंदर होता है।
- स्व–परागण और क्रॉस–परागण का महत्व – स्व-परागण कम ऊर्जा में निषेचन सुनिश्चित करता है, क्रॉस-परागण आनुवंशिक विविधता बढ़ाता है और प्रजाति को मजबूत बनाता है।
- लैंगिक प्रजनन की विशेषता – इसमें दो युग्मक मिलकर जाइगोट बनाते हैं। इससे नई पीढ़ी में माता-पिता दोनों की विशेषताएँ मिश्रित होती हैं और आनुवंशिक विविधता बढ़ती है।
- अलैंगिक प्रजनन की विशेषता – इसमें केवल एक माता जीव से नई पीढ़ी बनती है। नई पीढ़ी माता के समान होती है और प्रक्रिया तेज़ और सरल होती है।
- कली बनना का महत्व – कली बनना अलैंगिक प्रजनन का तरीका है। यह ऊर्जा कम खर्च करता है और जल्दी नई पीढ़ी उत्पन्न करने में मदद करता है।
- विखंडन का महत्व – शरीर के टुकड़े स्वतंत्र रूप से नए जीव में बदल जाते हैं। यह कठिन परिस्थितियों में भी जीवों की संख्या बढ़ाने में सहायक है।
- स्पोर का महत्व – स्पोर कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में ये नए जीव में विकसित होकर प्रजातियों का विस्तार करते हैं।
- कायिक प्रजनन का महत्व – पौधों में जड़, तना या पत्ती से नए पौधे बनते हैं। यह तेज़, सरल और कम ऊर्जा खर्च करने वाला तरीका है।
- अंकुरण का महत्व – बीज का अंकुरण नया पौधा बनाता है। इसमें जड़ पहले निकलती है, फिर अंकुर और पत्तियाँ विकसित होती हैं। यह जीवन चक्र का महत्वपूर्ण चरण है।
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PART-06 NOTES
- बीज का प्रसार (Seed Dispersal) – बीज हवा, पानी, जानवर या मानव गतिविधियों के माध्यम से फैलते हैं। यह नए स्थानों पर पौधों का विकास सुनिश्चित करता है और पौधों की प्रजातियों के विस्तार में मदद करता है।
- हवा द्वारा बीज प्रसार – हल्के और पंख वाले बीज हवा से दूर तक फैलते हैं। उदाहरण: पीपल, नीम। यह पौधों को नए वातावरण में फैलने में सहायता करता है।
- पानी द्वारा बीज प्रसार – जलज पौधों के बीज पानी के माध्यम से दूर तक फैलते हैं। उदाहरण: नारियल। पानी बीज को सुरक्षित रखता है और नए स्थानों पर अंकुरण सुनिश्चित करता है।
- जानवरों द्वारा बीज प्रसार – कुछ बीज चमकदार और मीठे होते हैं। जानवर इन्हें खाते हैं और शौच के माध्यम से अलग जगहों पर फैलाते हैं। उदाहरण: आम, अंगूर।
- मानव गतिविधियों द्वारा बीज प्रसार – खेती, गार्डनिंग और व्यापार के माध्यम से मानव बीज फैलाते हैं। यह नई जगहों पर पौधों के विकास और खेती में मदद करता है।
- अंडज प्राणी में बाहरी विकास – अंडज प्राणी जैसे मछली और मेंढक अंडे में भ्रूण विकसित करते हैं। यह संख्या अधिक होती है और जन्म बाहरी वातावरण में होता है।
- जरायुज प्राणी में आंतरिक विकास – मनुष्य और कुत्ते जैसे प्राणी भ्रूण को गर्भ में विकसित करते हैं। जन्म सुरक्षित होता है और संतानों की संख्या कम, लेकिन मजबूत होती है।
- बीज का संरक्षित रूप – बीज में भ्रूण कोषावरण और बीजकोष से सुरक्षित रहता है। यह अंकुरण और प्रारंभिक विकास के लिए पोषण और सुरक्षा प्रदान करता है।
- अंकुरण में समय – अंकुरण प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है। बीज पानी और ऑक्सीजन अवशोषित करता है, जड़ पहले निकलती है और अंकुर और पत्तियाँ धीरे-धीरे विकसित होती हैं।
- अंडज प्राणी में पर्यावरणीय प्रभाव – तापमान और आर्द्रता अंडज प्राणी के अंडे में भ्रूण के विकास को प्रभावित करते हैं। अनुकूल वातावरण में ही नया जीवन सुरक्षित रूप से उत्पन्न होता है।
- लैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक लाभ – लैंगिक प्रजनन नई पीढ़ी में माता और पिता की विशेषताएँ मिश्रित करता है। इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है और प्रजातियों की अनुकूलता में सुधार होता है।
- अलैंगिक प्रजनन में लाभ – तेज़ और सरल प्रजनन, कम ऊर्जा का उपयोग और अधिक संख्या में नई पीढ़ी उत्पन्न करना अलैंगिक प्रजनन के मुख्य लाभ हैं।
- कली बनना का कार्य – कली बनना हाइड्रा और यीस्ट जैसे जीवों में तेज़ी से संख्या बढ़ाने का तरीका है। यह ऊर्जा कम खर्च करता है और माता जीव सुरक्षित रहता है।
- विखंडन का कार्य – शरीर के टुकड़े स्वतंत्र जीव बन जाते हैं। यह कठिन परिस्थितियों में भी जीवों की संख्या बनाए रखता है और प्रजातियों के फैलाव में सहायक है।
- स्पोर का कार्य – स्पोर कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में स्पोर विकसित होकर नई पीढ़ी उत्पन्न करते हैं।
- कायिक प्रजनन का कार्य – पौधों में जड़, तना या पत्ती से नए पौधे बनते हैं। यह तेज़, सरल और कम ऊर्जा खर्च करने वाला तरीका है, खासकर खेती में उपयोगी है।
- स्व–परागण और क्रॉस–परागण का महत्व – स्व-परागण कम ऊर्जा में निषेचन सुनिश्चित करता है, क्रॉस-परागण आनुवंशिक विविधता बढ़ाता है और प्रजातियों को मजबूत बनाता है।
- जाइगोट का महत्व – निषेचन के बाद बनी जाइगोट नए जीव की पहली कोशिका होती है। यह विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करती है और प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करती है।
- भ्रूण का महत्व – भ्रूण में भविष्य के सभी अंग विकसित होते हैं। यह पौधे या प्राणी के जीवन और वृद्धि के लिए मुख्य आधार है।
- अंकुरण का महत्व – बीज का अंकुरण नया पौधा उत्पन्न करता है। इसमें जड़, अंकुर और पत्तियाँ विकसित होती हैं। यह जीवन चक्र का महत्वपूर्ण चरण है और नए पौधे के विकास को सुनिश्चित करता है।

MOST IMPORTENT VVI OBJECTIVE QUESTION-200 { TERGET-450+ EXAM 2027 }
-
- अलैंगिक प्रजनन में कौन सा प्रक्रिया नहीं होती है?
युग्मक निर्माण
B. कोशिका विभाजन
C. क्लोन बनना
D. द्विखंडन
उत्तर: A - द्विखंडन किसमें होता है?
हाइड्रा
B. अमीबा
C. यीस्ट
D. स्पाइरोगायरा
उत्तर: B - कली बनना किसमें होता है?
अमीबा
B. पैरामीशियम
C. यीस्ट
D. प्लाज्मोडियम
उत्तर: C - विखंडन किसमें पाया जाता है?
स्पाइरोगायरा
B. हाइड्रा
C. यीस्ट
D. अमीबा
उत्तर: A - जूओस्पोर क्या होते हैं?
अचल
B. चलायमान
C. बीज
D. युग्मक
उत्तर: B - कोनिडिया किसमें बनते हैं?
बैक्टीरिया
B. कवक
C. शैवाल
D. प्रोटोजोआ
उत्तर: B - कायिक प्रजनन कौन से अंगों से होता है?
केवल जड़
B. केवल पत्ती
C. जड़, तना और पत्ती
D. केवल फूल
उत्तर: C - आलू में प्रजनन किस अंग से होता है?
राइजोम
B. कंद
C. बल्ब
D. कॉर्म
उत्तर: B - ब्रायोफिलम में प्रजनन किस अंग से होता है?
तना
B. जड़
C. पत्ती
D. फूल
उत्तर: C - अधिकतम आनुवंशिक विविधता किस प्रकार के प्रजनन में होती है?
अलैंगिक
B. लैंगिक
C. द्विखंडन
D. कली बनना
उत्तर: B - अलैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक बदलाव क्यों नहीं होते?
कोशिका विभाजन नहीं होता
B. युग्मक की आवश्यकता नहीं होती
C. दोनों A और B
D. कोई नहीं
उत्तर: C - द्विखंडन मुख्य रूप से किस प्रकार के जीवों में पाया जाता है?
प्रोकैरियोट
B. यूकैरियोट
C. कवक
D. शैवाल
उत्तर: A - कायिक प्रजनन के कितने प्रकार हैं?
1
B. 2
C. 3
D. 4
उत्तर: C (तना, जड़, पत्ती) - कली बनना किस जीवों में होता है?
हाइड्रा
B. यीस्ट
C. हाइड्रा और यीस्ट दोनों
D. अमीबा
उत्तर: C - स्पोर मुख्य रूप से किसमें बनते हैं?
कवक
B. शैवाल
C. बैक्टीरिया
D. कवक और शैवाल दोनों
उत्तर: D - जूओस्पोर किस प्रकार के होते हैं?
एकल गुणसूत्र
B. द्विगुणित
C. अचल
D. युग्मक
उत्तर: A - कायिक प्रजनन की मुख्य विशेषता क्या है?
आनुवंशिक विविधता
B. क्लोन बनना
C. निषेचन
D. युग्मक निर्माण
उत्तर: B - आलू में प्रजनन का जिम्मेदार अंग कौन सा है?
जड़
B. तना
C. कंद
D. पत्ती
उत्तर: C - ब्रायोफिलम में पत्ती द्वारा प्रजनन किस प्रकार है?
लैंगिक
B. अलैंगिक
C. दोनों
D. निषेचन
उत्तर: B - अलैंगिक प्रजनन में कोशिका विभाजन किसके द्वारा होता है?
मिथोसिस
B. मेयोसिस
C. निषेचन
D. युग्मक मिलन
उत्तर: A - बाहरी निषेचन किसमें पाया जाता है?
पक्षी
B. उभयचर
C. स्तनधारी
D. सरीसृप
उत्तर: B - आंतरिक निषेचन किसमें होता है?
उभयचर
B. सरीसृप
C. मछली
D. शैवाल
उत्तर: B - अंडज-जरायुज प्राणी किस प्रकार होते हैं?
अंडे शरीर के बाहर देते हैं
B. बच्चे सीधे जन्म देते हैं
C. अंडे शरीर के अंदर फूटते हैं
D. प्रजनन नहीं करते
उत्तर: C - लैंगिक प्रजनन का मुख्य लाभ क्या है?
तेजी से संख्या वृद्धि
B. आनुवंशिक विविधता
C. जीवन रक्षा
D. कोई लाभ नहीं
उत्तर: B - हाइड्रा में प्रजनन का मुख्य तरीका क्या है?
द्विखंडन
B. कली बनना
C. विखंडन
D. कोनिडिया
उत्तर: B - यीस्ट में अलैंगिक प्रजनन किस प्रकार होता है?
द्विखंडन
B. कली बनना
C. विखंडन
D. स्पोर बनाना
उत्तर: B - शैवाल में प्रजनन का एक तरीका क्या है?
स्पोर बनाना
B. कली बनना
C. जरायुज जन्म
D. निषेचन
उत्तर: A - कोनिडिया किसमें बनते हैं?
कवक
B. शैवाल
C. बैक्टीरिया
D. प्रोटोजोआ
उत्तर: A - अधिकतम आनुवंशिक विविधता किसमें होती है?
द्विखंडन
B. कली बनना
C. लैंगिक प्रजनन
D. विखंडन
उत्तर: C - अलैंगिक प्रजनन के लाभ क्या हैं?
तेजी से जनसंख्या वृद्धि
B. समानता बनाए रखना
C. कम ऊर्जा खर्च
D. सभी
उत्तर: D - शैवाल में स्पोर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
गति
B. प्रजनन
C. पोषण
D. श्वसन
उत्तर: B - जूओस्पोर किससे चल सकते हैं?
झिल्ली
B. जंतुबाल
C. झुर्रियाँ
D. कोई नहीं
उत्तर: B - ब्रायोफिलम में पत्ती द्वारा प्रजनन किसका उदाहरण है?
विखंडन
B. कली बनना
C. कायिक प्रजनन
D. लैंगिक प्रजनन
उत्तर: C - अलैंगिक प्रजनन में कौन सा अंग नहीं बनता?
युग्मक
B. स्पोर
C. कली
D. कंद
उत्तर: A - द्विखंडन में कितनी कोशिकाएँ बनती हैं?
1
B. 2
C. 3
D. 4
उत्तर: B - हाइड्रा में कली किससे बनती है?
तना
B. शरीर की दीवार
C. जड़
D. भुजाएँ
उत्तर: B - कायिक प्रजनन मुख्य रूप से किस प्रकार के पौधों में होता है?
फूल वाले
B. बिना फूल वाले
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: C - आलू में कौन सा हिस्सा बीज का काम करता है?
पत्ती
B. तना
C. कंद
D. जड़
उत्तर: C - बाहरी निषेचन में क्या होता है?
युग्मक शरीर के बाहर मिलते हैं
B. युग्मक शरीर के अंदर मिलते हैं
C. निषेचन नहीं होता
D. दोनों
उत्तर: A - आंतरिक निषेचन की विशेषता क्या है?
सुरक्षा
B. कम संतान
C. अधिक संभावना
D. सभी
उत्तर: D - जरायुज प्राणी कौन से हैं?
मेंढक
B. मनुष्य
C. कछुआ
D. मछली
उत्तर: B - अंडज-जरायुज प्राणी का उदाहरण क्या है?
कछुआ
B. शार्क
C. मेंढक
D. उल्लू
उत्तर: B - द्विखंडन मुख्य रूप से किसमें होता है?
प्रोकैरियोट
B. यूकैरियोट
C. कवक
D. शैवाल
उत्तर: A - स्पोर बनाना किस प्रकार का प्रजनन है?
लैंगिक
B. अलैंगिक
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: B - कायिक प्रजनन से उत्पन्न पौधे किस प्रकार के होते हैं?
आनुवंशिक रूप से भिन्न
B. आनुवंशिक रूप से समान
C. आधे माता-पिता के गुण
D. यादृच्छिक
उत्तर: B - कली बनते समय कौन सा अंग विकसित होता है?
नई कोशिका
B. नया जीव
C. युग्मक
D. स्पोर
उत्तर: B - विखंडन मुख्य रूप से किसमें होता है?
यीस्ट
B. शैवाल
C. प्रोटोजोआ
D. हाइड्रा
उत्तर: B - बाहरी निषेचन किस प्रकार के जीवों में होता है?
स्थलीय
B. जलीय
C. पक्षी
D. स्तनधारी
उत्तर: B - आंतरिक निषेचन किसे सुरक्षा देता है?
भ्रूण
B. युग्मक
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: A - लैंगिक प्रजनन का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
तेजी से प्रजनन
B. आनुवंशिक विविधता
C. कम ऊर्जा खर्च
D. क्लोन बनाना
उत्तर: B - आंतरिक निषेचन किसका प्रमुख उदाहरण है?
मेंढक
B. कछुआ
C. मछली
D. शैवाल
उत्तर: B - बाहरी निषेचन किसमें अधिक पाया जाता है?
जलजीव
B. स्थलीय जीव
C. पक्षी
D. स्तनधारी
उत्तर: A - अंडज-जरायुज प्राणी का एक उदाहरण क्या है?
मेंढक
B. शार्क
C. उल्लू
D. मनुष्य
उत्तर: B - जरायुज (Viviparous) प्राणी कौन सा है?
मेंढक
B. कछुआ
C. मनुष्य
D. शार्क
उत्तर: C - युग्मक और अंडाणु के मिलन को क्या कहते हैं?
द्विखंडन
B. निषेचन
C. कली बनना
D. विखंडन
उत्तर: B - किसमें बाहरी निषेचन पाया जाता है?
मेंढक
B. सरीसृप
C. मनुष्य
D. पक्षी
उत्तर: A - किसमें आंतरिक निषेचन पाया जाता है?
मेंढक
B. सरीसृप
C. मछली
D. शैवाल
उत्तर: B - अलैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक समानता क्यों होती है?
मिथोसिस द्वारा
B. युग्मक न बनने के कारण
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: C - द्विखंडन किसमें सामान्य है?
प्रोकैरियोट
B. यूकैरियोट
C. कवक
D. शैवाल
उत्तर: A - कली बनना किसमें पाया जाता है?
हाइड्रा
B. यीस्ट
C. दोनों
D. अमीबा
उत्तर: C - विखंडन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
प्रजनन
B. भोजन
C. गति
D. श्वसन
उत्तर: A - जूओस्पोर की प्रमुख विशेषता क्या है?
निष्क्रिय
B. चलायमान
C. युग्मक
D. बीज
उत्तर: B - कायिक प्रजनन किसे कहते हैं?
जड़, तना, पत्ती से प्रजनन
B. युग्मक द्वारा प्रजनन
C. स्पोर द्वारा प्रजनन
D. कली बनना
उत्तर: A - अलैंगिक प्रजनन के लाभ क्या हैं?
जल्दी जनसंख्या वृद्धि
B. ऊर्जा की बचत
C. समानता बनाए रखना
D. सभी
उत्तर: D - शैवाल में स्पोर किसका कार्य करते हैं?
गति
B. प्रजनन
C. पोषण
D. श्वसन
उत्तर: B - ब्रायोफिलम में पत्ती से प्रजनन किस प्रकार होता है?
लैंगिक
B. अलैंगिक
C. दोनों
D. निषेचन
उत्तर: B - अलैंगिक प्रजनन में युग्मक क्यों नहीं बनते?
मिथोसिस के कारण
B. युग्मक की आवश्यकता नहीं
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: B - द्विखंडन के परिणामस्वरूप कितनी कोशिकाएँ बनती हैं?
1
B. 2
C. 3
D. 4
उत्तर: B - हाइड्रा में कली किससे बनती है?
तना
B. शरीर की दीवार
C. जड़
D. भुजाएँ
उत्तर: B - आलू में प्रजनन किस अंग से होता है?
पत्ती
B. तना
C. कंद
D. जड़
उत्तर: C - बाहरी निषेचन में युग्मक कहाँ मिलते हैं?
शरीर के भीतर
B. शरीर के बाहर
C. जड़ में
D. पत्ती में
उत्तर: B - आंतरिक निषेचन की प्रमुख विशेषता क्या है?
भ्रूण की सुरक्षा
B. कम संतान
C. अधिक संभावना
D. सभी
उत्तर: D - जरायुज प्राणी कौन सा है?
मेंढक
B. मनुष्य
C. कछुआ
D. मछली
उत्तर: B - अंडज-जरायुज प्राणी का उदाहरण क्या है?
कछुआ
B. शार्क
C. मेंढक
D. उल्लू
उत्तर: B - लैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक विविधता क्यों होती है?
मेयोसिस के कारण
B. युग्मक का संयोग
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: C - जूओस्पोर किससे चल सकता है?
झिल्ली
B. जंतुबाल
C. झुर्रियाँ
D. कोई नहीं
उत्तर: B - कोनिडिया किसका उदाहरण है?
कवक का अलैंगिक प्रजनन
B. शैवाल का अलैंगिक प्रजनन
C. द्विखंडन
D. कली बनना
उत्तर: A - अलैंगिक प्रजनन में कौन सा अंग विकसित नहीं होता?
युग्मक
B. स्पोर
C. कली
D. कंद
उत्तर: A - द्विखंडन किसका विशेष प्रकार है?
कोशिका विभाजन
B. युग्मक निर्माण
C. स्पोर बनाना
D. कली बनना
उत्तर: A - कली बनते समय कौन सा अंग विकसित होता है?
कोशिका
B. नया जीव
C. युग्मक
D. स्पोर
उत्तर: B - विखंडन मुख्य रूप से किसमें होता है?
यीस्ट
B. शैवाल
C. प्रोटोजोआ
D. हाइड्रा
उत्तर: B - बाहरी निषेचन किस जीवों में अधिक पाया जाता है?
स्थलीय
B. जलीय
C. पक्षी
D. स्तनधारी
उत्तर: B - आंतरिक निषेचन किसे सुरक्षा देता है?
भ्रूण
B. युग्मक
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: A - लैंगिक प्रजनन का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
तेजी से प्रजनन
B. आनुवंशिक विविधता
C. कम ऊर्जा खर्च
D. क्लोन बनाना
उत्तर: B - द्विखंडन किस प्रकार के जीवों में सामान्य है?
प्रोकैरियोट
B. यूकैरियोट
C. कवक
D. शैवाल
उत्तर: A - कली बनना किसमें पाया जाता है?
हाइड्रा
B. यीस्ट
C. दोनों
D. अमीबा
उत्तर: C - विखंडन का उद्देश्य क्या है?
प्रजनन
B. पोषण
C. गति
D. श्वसन
उत्तर: A - जूओस्पोर की मुख्य विशेषता क्या है?
निष्क्रिय
B. चलायमान
C. युग्मक
D. बीज
उत्तर: B - कायिक प्रजनन को परिभाषित कीजिए।
जड़, तना, पत्ती से प्रजनन
B. युग्मक द्वारा प्रजनन
C. स्पोर द्वारा प्रजनन
D. कली बनना
उत्तर: A - अलैंगिक प्रजनन के लाभ क्या हैं?
जल्दी जनसंख्या वृद्धि
B. ऊर्जा की बचत
C. समानता बनाए रखना
D. सभी
उत्तर: D - शैवाल में स्पोर का कार्य क्या है?
गति
B. प्रजनन
C. पोषण
D. श्वसन
उत्तर: B - ब्रायोफिलम में पत्ती से प्रजनन किस प्रकार होता है?
लैंगिक
B. अलैंगिक
C. दोनों
D. निषेचन
उत्तर: B - अलैंगिक प्रजनन में युग्मक क्यों नहीं बनते?
मिथोसिस के कारण
B. युग्मक की आवश्यकता नहीं
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: B - द्विखंडन से कितनी कोशिकाएँ बनती हैं?
1
B. 2
C. 3
D. 4
उत्तर: B - हाइड्रा में कली किससे बनती है?
तना
B. शरीर की दीवार
C. जड़
D. भुजाएँ
उत्तर: B - आलू में प्रजनन किस अंग से होता है?
पत्ती
B. तना
C. कंद
D. जड़
उत्तर: C - बाहरी निषेचन में युग्मक कहाँ मिलते हैं?
शरीर के भीतर
B. शरीर के बाहर
C. जड़ में
D. पत्ती में
उत्तर: B - आंतरिक निषेचन की प्रमुख विशेषता क्या है?
भ्रूण की सुरक्षा
B. कम संतान
C. अधिक संभावना
D. सभी
उत्तर: D - जरायुज प्राणी कौन सा है?
मेंढक
B. मनुष्य
C. कछुआ
D. मछली
उत्तर: B - अंडज-जरायुज प्राणी का उदाहरण क्या है?
कछुआ
B. शार्क
C. मेंढक
D. उल्लू
उत्तर: B- युग्मक के निर्माण की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
A. मिथोसिस
B. मेयोसिस
C. कली बनना
D. द्विखंडन
उत्तर: B - पौधों में परागकण किसके द्वारा बने?
A. तना
B. पत्ती
C. पुरुष अंग (सूत्रक)
D. जड़
उत्तर: C - शिशु पौधे का विकास किस चरण से शुरू होता है?
A. बीज
B. कली
C. स्पोर
D. युग्मक
उत्तर: A - द्विपुंषक पौधे क्या होते हैं?
A. जिनमें केवल पुरुष अंग हों
B. जिनमें केवल स्त्री अंग हों
C. जिनमें पुरुष और स्त्री अंग दोनों हों
D. जिनमें कोई अंग नहीं
उत्तर: C - पौधों में अंडाणु कहाँ पाया जाता है?
A. परागकण में
B. अंडाशय में
C. पत्ती में
D. तने में
उत्तर: B - निषेचन के तुरंत बाद बनने वाली कोशिका को क्या कहते हैं?
A. बीज
B. भ्रूण
C. जाइगोट
D. स्पोर
उत्तर: C - लैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक विविधता कैसे बढ़ती है?
A. युग्मक संयोग
B. क्रॉसिंग ओवर
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: C - भ्रूण का विकास किस चरण में अधिक सक्रिय होता है?
A. बीज
B. प्रात्यंभिक भ्रूण
C. किशोर अवस्था
D. वयस्क अवस्था
उत्तर: B - किसमें बाह्य निषेचन और बाह्य विकास दोनों होते हैं?
A. मेंढक
B. कछुआ
C. मनुष्य
D. पक्षी
उत्तर: A - किसमें आंतरिक निषेचन और आंतरिक विकास होता है?
A. मेंढक
B. कछुआ
C. मनुष्य
D. मछली
उत्तर: C - मादा युग्मक का दूसरा नाम क्या है?
A. परागकण
B. अंडाणु
C. स्पोर
D. कली
उत्तर: B - पुरुष युग्मक का दूसरा नाम क्या है?
A. परागकण
B. अंडाणु
C. बीज
D. भ्रूण
उत्तर: A - पौधों में परागकण किसके माध्यम से फैलता है?
A. हवा
B. पानी
C. कीट
D. सभी
उत्तर: D - पौधों में आत्म निषेचन कब होता है?
A. जब परागकण उसी फूल के स्त्रीांग से मिलता है
B. जब परागकण दूसरे फूल से आता है
C. जब बीज बाहर गिरता है
D. जब जड़ से अंकुरित होता है
उत्तर: A - पौधों में परागकण और अंडाणु का मिलन क्या बनाता है?
A. स्पोर
B. जाइगोट
C. कली
D. क्लोन
उत्तर: B - बीज का संरचना किससे मिलकर बनता है?
A. भ्रूण, जड़, तना
B. भ्रूण, कोषावरण, बीजकला
C. कली, स्पोर, युग्मक
D. कोई नहीं
उत्तर: B - पौधों में द्विपुंषक और एकपुंषक का अंतर क्या है?
A. फूल में अंगों की संख्या
B. फूल में पुरुष और स्त्री अंग
C. बीज की संख्या
D. कोई नहीं
उत्तर: B - परागकण निषेचन के लिए किस तक जाता है?
A. तना
B. अंडाशय
C. पत्ती
D. जड़
उत्तर: B - पौधों में बीज का अंकुरण किस पर निर्भर करता है?
A. पानी
B. तापमान
C. ऑक्सीजन
D. सभी
उत्तर: D - परागकण और अंडाणु का मिलन किस प्रक्रिया से होता है?
A. मिथोसिस
B. निषेचन
C. कली बनना
D. द्विखंडन
उत्तर: B - पौधों में आत्म निषेचन और परागण का लाभ क्या है?
A. जल्दी प्रजनन
B. कम ऊर्जा खर्च
C. बीज की सुरक्षा
D. सभी
उत्तर: D - लैंगिक प्रजनन में भ्रूण का विकास कितने चरणों में होता है?
A. 1
B. 2
C. 3
D. 4
उत्तर: C - पौधों में बीज का जीवन चक्र कब शुरू होता है?
A. बीज से अंकुरण
B. फूल से
C. कली से
D. जड़ से
उत्तर: A - पौधों में बीज में ऊर्जा का मुख्य स्रोत क्या होता है?
A. स्पोर
B. एंडोस्पर्म
C. पत्ती
D. तना
उत्तर: B - स्पोर किसके द्वारा बनता है?
A. द्विपुंषक पौधे
B. कवक और शैवाल
C. स्तनधारी
D. सभी
उत्तर: B - जूओस्पोर और एस्पोर में अंतर क्या है?
A. जूओस्पोर चलायमान होता है, एस्पोर अचल
B. जूओस्पोर अचल होता है, एस्पोर चलायमान
C. दोनों चलायमान
D. दोनों अचल
उत्तर: A - बीज का संरचना किसमें विभाजित होती है?
A. भ्रूण, कोषावरण, बीजकला
B. भ्रूण, जड़, पत्ती
C. तना, पत्ती, बीजकला
D. कोई नहीं
उत्तर: A - बीज अंकुरित होने के लिए आवश्यक है:
A. पानी
B. ऑक्सीजन
C. उचित तापमान
D. सभी
उत्तर: D - पौधों में परागकण का मुख्य कार्य क्या है?
A. पोषण
B. प्रजनन
C. श्वसन
D. गति
उत्तर: B - पौधों में आत्म निषेचन की प्रमुख विशेषता क्या है?
A. युग्मक उसी फूल में मिलता है
B. ऊर्जा की बचत
C. जल्दी प्रजनन
D. सभी
उत्तर: D - परागकण और अंडाणु के मिलन के बाद क्या बनता है?
A. क्लोन
B. जाइगोट
C. स्पोर
D. कली
उत्तर: B - बीजकला किसका हिस्सा होती है?
A. स्त्री अंग
B. पुरुष अंग
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: A - बीजकला में कौन सा भाग अंडाणु रखता है?
A. अंडाशय
B. परागकोष
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: A - पौधों में बीज का विकास किसके माध्यम से होता है?
A. युग्मक मिलन
B. मिथोसिस
C. द्विखंडन
D. कली बनना
उत्तर: A - पौधों में बीज में भ्रूण के विकास की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
A. अंकुरण
B. निषेचन
C. कली बनना
D. द्विखंडन
उत्तर: A - बीजकला और परागकण के मिलन की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
A. कली बनना
B. निषेचन
C. द्विखंडन
D. विखंडन
उत्तर: B - बीज का संरक्षण किससे होता है?
A. बीजकला
B. कोषावरण और बीजकोष
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: B - पौधों में बीज के अंकुरण के लिए सबसे जरूरी है:
A. प्रकाश
B. पानी, ऑक्सीजन, तापमान
C. पोषण
D. मिट्टी का प्रकार
उत्तर: B - द्विपुंषक और एकपुंषक पौधों में क्या अंतर है?
A. फूल का लिंग
B. बीज की संख्या
C. युग्मक की संरचना
D. कोई नहीं
उत्तर: A - पौधों में युग्मक का उद्देश्य क्या है?
A. पोषण
B. प्रजनन
C. जल धारण
D. ऊर्जा संग्रह
उत्तर: B - पौधों में परागण की प्रक्रिया किसे कहते हैं?
A. परागकण का फैलना
B. बीज बनाना
C. अंकुरण
D. कली बनना
उत्तर: A - पौधों में स्पोर किस प्रकार के प्रजनन का हिस्सा हैं?
A. अलैंगिक
B. लैंगिक
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: A - कवक में स्पोर किस अंग से बनते हैं?
A. स्पोरोफाइट
B. थैलस
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: B - जलीय पौधों में बीज का विकास किसमें सहायक होता है?
A. पानी
B. हवा
C. मिट्टी
D. प्रकाश
उत्तर: A - पौधों में आत्म निषेचन में आनुवंशिक विविधता कम क्यों होती है?
A. युग्मक एक ही फूल से मिलता है
B. ऊर्जा अधिक खर्च होती है
C. जड़ का विकास धीमा होता है
D. कोई नहीं
उत्तर: A - परागकण का फैलाव किसके द्वारा हो सकता है?
A. हवा
B. पानी
C. कीट
D. सभी
उत्तर: D - बीज में भ्रूण का विकास किस अंग से शुरू होता है?
A. कोषावरण
B. भ्रूण
C. बीजकोष
D. पत्ती
उत्तर: B - पौधों में युग्मक मिलन के बाद कौन सी संरचना बनती है?
A. कली
B. जाइगोट
C. क्लोन
D. स्पोर
उत्तर: B - बीजकला के किस भाग में अंडाणु होता है?
A. परागकोष
B. अंडाशय
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: B - पौधों में बीज का अंकुरण कब शुरू होता है?
A. पानी मिलने पर
B. अंधकार में
C. गर्मी में
D. हवा के संपर्क में
उत्तर: A
भाग 4: प्रश्न 151–200
- पौधों में बीज का विकास किस चरण से शुरू होता है?
A. परागकण
B. जाइगोट
C. कली
D. स्पोर
उत्तर: B - बीज के विकास में भ्रूण के बाहर क्या बनता है?
A. बीजकला
B. कोषावरण
C. युग्मक
D. परागकण
उत्तर: B - पौधों में कोषावरण का मुख्य कार्य क्या है?
A. भ्रूण का पोषण
B. परागकण का उत्पादन
C. बीज का अंकुरण
D. जड़ का विकास
उत्तर: A - बीजकला और परागकण के मिलन को क्या कहते हैं?
A. कली बनना
B. द्विखंडन
C. निषेचन
D. स्पोर बनाना
उत्तर: C - बीज में भ्रूण और कोषावरण के अलावा कौन सी संरचना होती है?
A. तना
B. पत्ती
C. बीजकोष
D. कली
उत्तर: C - पौधों में बीज का अंकुरण किस प्रक्रिया से शुरू होता है?
A. मिथोसिस
B. निषेचन
C. जल अवशोषण
D. कली बनना
उत्तर: C - अंकुरण में सबसे पहले कौन सी क्रिया होती है?
A. जड़ का विकास
B. कोषावरण का पाचन
C. अंकुर का बाहर निकलना
D. पत्ती का विकास
उत्तर: B - बीज का जीवन चक्र कितने चरणों में पूरा होता है?
A. 1
B. 2
C. 3
D. 4
उत्तर: C - जलीय पौधों में परागकण का फैलाव मुख्य रूप से किसके द्वारा होता है?
A. हवा
B. पानी
C. कीट
D. मिट्टी
उत्तर: B - परागण के लिए हवा का क्या महत्व है?
A. युग्मक का उत्पादन
B. परागकण का वितरण
C. बीज का अंकुरण
D. भ्रूण का पोषण
उत्तर: B - पौधों में कीट परागण किस प्रकार का होता है?
A. स्व-परागण
B. परागकण का हस्तांतरण
C. युग्मक का निर्माण
D. बीज का अंकुरण
उत्तर: B - कवक में अलैंगिक प्रजनन किससे होता है?
A. कली
B. स्पोर
C. युग्मक
D. बीज
उत्तर: B - स्पोर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. पोषण
B. प्रजनन
C. ऊर्जा संग्रह
D. जल धारण
उत्तर: B - जीवाणु में द्विखंडन के दौरान आनुवंशिक विविधता क्यों नहीं होती?
A. मिथोसिस नहीं होती
B. युग्मक नहीं बनते
C. दोनों
D. कोई नहीं
उत्तर: C - यीस्ट में अलैंगिक प्रजनन किसके द्वारा होता है?
A. द्विखंडन
B. कली बनना
C. स्पोर
D. विखंडन
उत्तर: B - हाइड्रा में कली बनते समय कौन सा भाग विकसित होता है?
A. शरीर की दीवार
B. जड़
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: A - शैवाल में विखंडन का उद्देश्य क्या है?
A. पोषण
B. प्रजनन
C. गति
D. श्वसन
उत्तर: B - पौधों में परागकण और अंडाणु के मिलन से बनने वाली कोशिका को क्या कहते हैं?
A. स्पोर
B. जाइगोट
C. कली
D. क्लोन
उत्तर: B - पौधों में बीज में भ्रूण को पोषण कौन देता है?
A. बीजकोष
B. कोषावरण
C. पत्ती
D. तना
उत्तर: B - पौधों में आत्म निषेचन का लाभ क्या है?
A. ऊर्जा की बचत
B. जल्दी प्रजनन
C. बीज की सुरक्षा
D. सभी
उत्तर: D - द्विपुंषक और एकपुंषक पौधों में मुख्य अंतर क्या है?
A. फूल का लिंग
B. बीज का आकार
C. जड़ का विकास
D. पत्ती की संख्या
उत्तर: A - पौधों में परागकण का मुख्य कार्य क्या है?
A. पोषण
B. प्रजनन
C. जल धारण
D. ऊर्जा संग्रह
उत्तर: B - पौधों में परागकण का फैलाव किसके द्वारा हो सकता है?
A. हवा
B. पानी
C. कीट
D. सभी
उत्तर: D - बीज में भ्रूण किससे विकसित होता है?
A. कोषावरण
B. जाइगोट
C. बीजकोष
D. पत्ती
उत्तर: B - बीजकला में कौन सा भाग अंडाणु रखता है?
A. अंडाशय
B. परागकोष
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: A - पौधों में बीज का अंकुरण किसके बिना नहीं हो सकता?
A. पानी
B. ऑक्सीजन
C. उपयुक्त तापमान
D. सभी
उत्तर: D - पौधों में निषेचन के तुरंत बाद कौन सी प्रक्रिया होती है?
A. जड़ का विकास
B. भ्रूण का विकास
C. अंकुरण
D. पत्ती का विकास
उत्तर: B - बीज में कोषावरण किसका कार्य करता है?
A. भ्रूण का पोषण
B. बीज का अंकुरण
C. परागकण का निर्माण
D. तना का विकास
उत्तर: A - जलीय पौधों में बीज का विकास किसे सहारा देता है?
A. पानी
B. हवा
C. मिट्टी
D. प्रकाश
उत्तर: A - बीजकला में अंडाणु किस अंग में पाया जाता है?
A. अंडाशय
B. परागकोष
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: A - पौधों में बीज का अंकुरण किस प्रक्रिया से शुरू होता है?
A. जल अवशोषण
B. निषेचन
C. मिथोसिस
D. कली बनना
उत्तर: A - पौधों में बीज का अंकुरण किस चरण में तेज होता है?
A. बीजकला बनने के बाद
B. जब पर्याप्त पानी और तापमान मिलता है
C. जब पत्ती विकसित होती है
D. जब जड़ विकसित होती है
उत्तर: B - लैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक विविधता कैसे आती है?
A. मेयोसिस और युग्मक संयोग
B. द्विखंडन
C. कली बनना
D. विखंडन
उत्तर: A - पौधों में परागकण और अंडाणु का मिलन किस प्रकार होता है?
A. बाह्य निषेचन
B. आंतरिक निषेचन
C. कोई नहीं
D. दोनों
उत्तर: B - पौधों में स्व-परागण और क्रॉस-परागण में अंतर क्या है?
A. युग्मक स्रोत
B. ऊर्जा खर्च
C. आनुवंशिक विविधता
D. सभी
उत्तर: D - पौधों में बीज के अंकुरण के लिए कौन सा घटक सबसे महत्वपूर्ण है?
A. प्रकाश
B. मिट्टी का प्रकार
C. पानी और ऑक्सीजन
D. हवा
उत्तर: C - पौधों में बीजकला किस अंग का हिस्सा होती है?
A. स्त्री अंग
B. पुरुष अंग
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: A - पौधों में बीजकला और परागकण किसके द्वारा विकसित होते हैं?
A. मिथोसिस
B. मेयोसिस
C. द्विखंडन
D. कली बनना
उत्तर: B - बीज का जीवन चक्र कितने चरणों में पूरा होता है?
A. 2
B. 3
C. 4
D. 5
उत्तर: B - पौधों में निषेचन के बाद कौन सी संरचना बनती है?
A. बीज
B. क्लोन
C. कली
D. स्पोर
उत्तर: A - बीज में भ्रूण को सबसे अधिक पोषण कौन देता है?
A. कोषावरण
B. बीजकोष
C. तना
D. पत्ती
उत्तर: B - पौधों में क्रॉस-परागण का मुख्य लाभ क्या है?
A. आनुवंशिक विविधता
B. जल्दी प्रजनन
C. कम ऊर्जा खर्च
D. बीज सुरक्षा
उत्तर: A - बीज अंकुरण के लिए आवश्यक तत्व कौन सा नहीं है?
A. पानी
B. ऑक्सीजन
C. तापमान
D. परागकण
उत्तर: D - पौधों में बीज अंकुरण किस अंग से शुरू होता है?
A. जड़
B. भ्रूण
C. पत्ती
D. तना
उत्तर: B - बीजकला और परागकण का मिलन किसे जन्म देता है?
A. क्लोन
B. जाइगोट
C. कली
D. स्पोर
उत्तर: B - पौधों में निषेचन और बीज बनना किस प्रक्रिया का परिणाम है?
A. द्विखंडन
B. लैंगिक प्रजनन
C. अलैंगिक प्रजनन
D. कली बनना
उत्तर: B - बीज में भ्रूण और कोषावरण के अलावा कौन सी संरचना होती है?
A. तना
B. पत्ती
C. बीजकोष
D. कली
उत्तर: C - पौधों में बीज का अंकुरण कब शुरू होता है?
A. पर्याप्त जल मिलने पर
B. प्रकाश मिलने पर
C. हवा मिलने पर
D. मिट्टी मिलने पर
उत्तर: A - पौधों में क्रॉस-परागण के दौरान आनुवंशिक विविधता क्यों बढ़ती है?
A. अलग-अलग स्रोतों के युग्मक मिलने से
B. द्विखंडन से
C. कली बनने से
D. विखंडन से
उत्तर: A - पौधों में बीज और अंकुरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. प्रजनन और प्रजाति की वृद्धि
B. पोषण
C. जल धारण
D. प्रकाश संश्लेषण
उत्तर: A
- युग्मक के निर्माण की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
- अलैंगिक प्रजनन में कौन सा प्रक्रिया नहीं होती है?
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- प्रजनन क्या है?
प्रजनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जीव अपने जैसे नए जीव पैदा करते हैं। यह प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने, संख्या बढ़ाने और जीवन चक्र को जारी रखने में मदद करता है। - लैंगिक और अलैंगिक प्रजनन में अंतर बताइए।
लैंगिक प्रजनन में दो युग्मक (पुरुष और स्त्री) शामिल होते हैं और नए जीव में आनुवंशिक विविधता होती है। अलैंगिक प्रजनन में केवल एक माता जीव से नए जीव बनते हैं, जो माता के समान और क्लोन होते हैं। - अलैंगिक प्रजनन के प्रकार क्या हैं?
अलैंगिक प्रजनन के मुख्य प्रकार हैं: द्विखंडन, कली बनना, विखंडन, स्पोर निर्माण और कायिक प्रजनन। ये सभी तरीके केवल एक माता जीव से नए जीव बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाते हैं। - द्विखंडन क्या है?
द्विखंडन एक सरल अलैंगिक प्रजनन है, जिसमें माता जीव अपनी कोशिका या शरीर को दो बराबर हिस्सों में बाँटकर दो नए जीव बनाता है। यह प्रायः प्रोकैरियोटिक जीव और कुछ प्रोटोजोआ में पाया जाता है। - कली बनना क्या है?
कली बनना अलैंगिक प्रजनन का तरीका है, जिसमें माता जीव की दीवार से एक छोटी गांठ या कली विकसित होती है, जो धीरे-धीरे बढ़कर स्वतंत्र नया जीव बन जाती है। - विखंडन किसमें पाया जाता है?
विखंडन मुख्य रूप से शैवाल और कुछ प्रोटोजोआ में पाया जाता है। इसमें जीव का शरीर कई टुकड़ों में टूट जाता है और हर टुकड़ा नए जीव के रूप में विकसित हो जाता है। - स्पोर क्या हैं?
स्पोर अलैंगिक प्रजनन में बनने वाले छोटे संरचनात्मक अंग हैं। ये सूखे और कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव के रूप में विकसित हो जाते हैं। - कायिक प्रजनन का उदाहरण क्या है?
कायिक प्रजनन में पौधों के किसी अंग जैसे जड़, तना या पत्ती से नए पौधे बनते हैं। उदाहरण के लिए, आलू का कंद और गाजर की जड़। यह प्रक्रिया पौधों के लिए सरल और तेज प्रजनन का तरीका है। - लैंगिक प्रजनन के लाभ क्या हैं?
लैंगिक प्रजनन से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है, जिससे जीव नई परिस्थितियों में अनुकूल हो सकते हैं। यह प्राकृतिक चयन में मदद करता है और प्रजातियों के लम्बे समय तक अस्तित्व को सुनिश्चित करता है। - लैंगिक प्रजनन के मुख्य अंग कौन से हैं?
लैंगिक प्रजनन के मुख्य अंग पुरुष युग्मक (परागकण) और स्त्री युग्मक (अंडाणु) हैं। ये अंग मिलकर निषेचन करते हैं और नए जीव का निर्माण सुनिश्चित करते हैं। - युग्मक क्या है?
युग्मक वह विशेष कोशिका है जो लैंगिक प्रजनन में दोनों माता जीवों से मिलती है और नई पीढ़ी के जीव का निर्माण करती है। पुरुष युग्मक और स्त्री युग्मक मिलकर जाइगोट बनाते हैं। - बाह्य निषेचन क्या है?
बाह्य निषेचन में पुरुष और स्त्री युग्मक शरीर के बाहर मिलते हैं। यह जलजीवों में आम है, जहाँ अंडे और परागकण पानी में रिलीज होते हैं और वहीं निषेचन होता है। - आंतरिक निषेचन क्या है?
आंतरिक निषेचन में पुरुष युग्मक स्त्री प्रजनन अंग के अंदर अंडाणु से मिलते हैं। यह स्थलीय जीवों में सामान्य है, जिससे भ्रूण सुरक्षित रहता है और सफल प्रजनन होता है। - जरायुज और अंडज प्राणी में अंतर बताइए।
अंडज प्राणी में भ्रूण अंडे के अंदर विकसित होता है और शरीर के बाहर जन्म लेता है। जरायुज प्राणी में भ्रूण माँ के शरीर में विकसित होता है और जीवन का आरंभ वहीं होता है। - बीज का निर्माण कैसे होता है?
पौधों में बीज निषेचन के बाद बनता है। पुरुष और स्त्री युग्मक मिलकर जाइगोट बनाते हैं, जो भ्रूण में विकसित होता है। कोषावरण भ्रूण को पोषण देता है और पूरी संरचना बीज बनाती है। - बीजकला क्या है?
बीजकला स्त्री पुष्प का अंग है, जिसमें अंडाणु स्थित होता है। निषेचन के बाद यह बीज का रूप लेता है और नए पौधे के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है। - परागकण का मुख्य कार्य क्या है?
परागकण का कार्य अंडाणु तक पुरुष युग्मक पहुँचाना और निषेचन में मदद करना है। यह लैंगिक प्रजनन की सफलता के लिए आवश्यक है और बीज बनने में योगदान करता है। - स्व–परागण और क्रॉस–परागण में अंतर बताइए।
स्व-परागण में परागकण उसी फूल के अंडाणु से मिलता है, जबकि क्रॉस-परागण में परागकण किसी अन्य फूल के अंडाणु से मिलता है। क्रॉस-परागण से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। - क्रॉस–परागण का लाभ क्या है?
क्रॉस-परागण से पौधों में आनुवंशिक विविधता बढ़ती है, जिससे नई परिस्थितियों के अनुकूल पौधे विकसित होते हैं। यह प्रजातियों के अस्तित्व और स्थायित्व में मदद करता है। - बीज अंकुरण के लिए आवश्यक क्या हैं?
बीज अंकुरण के लिए पानी, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान जरूरी हैं। ये कारक भ्रूण को सक्रिय करते हैं, कोषावरण से पोषण प्राप्त होता है और नया पौधा विकसित होता है।
Bihar Board class 12th hindi Digant bhag 2 lesson 01 Batchit बातचीत
- अंडाणु और परागकण के मिलन से क्या बनता है?
अंडाणु और परागकण के मिलन से जाइगोट बनता है। जाइगोट नई पीढ़ी की शुरुआत करता है और बीज में भ्रूण के रूप में विकसित होकर नए पौधे का निर्माण करता है। - बीज के मुख्य भाग कौन से होते हैं?
बीज के मुख्य भाग हैं: भ्रूण, कोषावरण और बीजकोष। भ्रूण नए पौधे का रूप लेता है, कोषावरण भ्रूण को पोषण देता है और बीजकोष बीज को सुरक्षा प्रदान करता है। - कोषावरण का कार्य क्या है?
कोषावरण बीज में भ्रूण को पोषण देता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा भंडारित होते हैं, जिससे बीज अंकुरण और नए पौधे के विकास में मदद मिलती है। - बीजकोष का कार्य बताइए।
बीजकोष बीज के भ्रूण और कोषावरण को बाहरी नुकसान और सूखने से बचाता है। यह बीज की संरचना को मजबूत बनाता है और अंकुरण तक सुरक्षित रखता है। - पौधों में अंकुरण क्या है?
अंकुरण वह प्रक्रिया है जिसमें बीज को उचित जल, ऑक्सीजन और तापमान मिलने पर भ्रूण सक्रिय होकर नया पौधा विकसित करता है। यह जीवन चक्र का अगला महत्वपूर्ण चरण है। - बीज के अंकुरण के लिए किन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है?
बीज अंकुरण के लिए पानी, ऑक्सीजन और उचित तापमान आवश्यक हैं। ये परिस्थितियाँ भ्रूण को सक्रिय करती हैं और कोषावरण से पोषण ग्रहण कर नया पौधा विकसित करता है। - अलैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक विविधता क्यों कम होती है?
अलैंगिक प्रजनन में केवल एक माता जीव शामिल होता है और नए जीव उसी के समान होते हैं। इसलिए इसमें आनुवंशिक विविधता कम होती है और सभी नए जीव माता के क्लोन होते हैं। - लैंगिक प्रजनन में आनुवंशिक विविधता क्यों होती है?
लैंगिक प्रजनन में दो अलग-अलग युग्मक मिलते हैं। मेयोसिस और युग्मक संयोग के कारण नए जीवों में माता-पिता की विशेषताओं का मिश्रण होता है, जिससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। - बाह्य निषेचन के उदाहरण बताइए।
बाह्य निषेचन मुख्य रूप से जलजीवों में होता है। उदाहरण के लिए मछली और मेंढक में अंडे और परागकण पानी में निकलते हैं और वहीं निषेचन होता है। - आंतरिक निषेचन के उदाहरण बताइए।
आंतरिक निषेचन स्थलीय जीवों में होता है। उदाहरण के लिए मनुष्य, कछुआ और सस्तनधारी जीव। इसमें पुरुष युग्मक महिला प्रजनन अंग में अंडाणु से मिलता है। - अंडज और जरायुज में मुख्य अंतर बताइए।
अंडज प्राणी में भ्रूण अंडे में विकसित होता है और बाहर जन्म लेता है। जरायुज प्राणी में भ्रूण माँ के शरीर में विकसित होता है और जीवन वहीं आरंभ होता है। - द्विपुंषक और एकपुंषक पौधों में अंतर क्या है?
द्विपुंषक पौधे में एक ही फूल में पुरुष और स्त्री अंग दोनों होते हैं। एकपुंषक पौधे में अलग-अलग फूलों में पुरुष या स्त्री अंग होते हैं। - स्व–परागण के लाभ बताइए।
स्व-परागण में युग्मक उसी फूल के अंडाणु से मिलता है। इससे ऊर्जा कम खर्च होती है और फूलों में तेजी से बीज बन सकते हैं, हालांकि आनुवंशिक विविधता कम होती है। - क्रॉस–परागण के लाभ बताइए।
क्रॉस-परागण से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। इससे पौधे नई परिस्थितियों में अनुकूल बन सकते हैं और प्रजातियों का अस्तित्व सुरक्षित रहता है। - बीजकला में अंडाणु का स्थान कहाँ होता है?
बीजकला में अंडाणु अंडाशय में स्थित होता है। निषेचन के बाद अंडाणु भ्रूण में विकसित होता है और बीज का निर्माण करता है। - परागकण का निर्माण कहाँ होता है?
परागकण पुरुष अंग के परागकोष में बनते हैं। ये छोटे और हल्के होते हैं और हवा, पानी या कीट द्वारा अंडाणु तक पहुँचकर निषेचन में मदद करते हैं। - लैंगिक प्रजनन में भ्रूण किससे विकसित होता है?
लैंगिक प्रजनन में भ्रूण अंडाणु और परागकण के मिलन से विकसित होता है। यह जाइगोट के रूप में शुरू होता है और धीरे-धीरे बीज में नया पौधा बनता है। - बीज में भ्रूण को कौन पोषण देता है?
बीज में भ्रूण को मुख्य रूप से कोषावरण पोषण देता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा रहते हैं, जो अंकुरण और विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं। - अलैंगिक प्रजनन के उदाहरण बताइए।
अलैंगिक प्रजनन के उदाहरण हैं: हाइड्रा में कली बनना, यीस्ट में कली बनना, शैवाल में विखंडन और कवक में स्पोर निर्माण। यह सभी बिना युग्मक के नए जीव बनाते हैं। - बीजकोष का महत्व क्या है?
बीजकोष बीज के भ्रूण और कोषावरण को बाहरी नुकसान, सूखने और कीट से बचाता है। यह बीज को सुरक्षित रखता है और अंकुरण तक उसकी संरचना को मजबूत बनाए रखता है।
- बीज अंकुरण किस प्रकार से शुरू होता है?
बीज अंकुरण तब शुरू होता है जब बीज को पर्याप्त पानी, ऑक्सीजन और उचित तापमान मिलता है। पानी बीज में प्रवेश कर भ्रूण सक्रिय करता है और कोषावरण से पोषण ग्रहण कर नए पौधे का विकास करता है। - अंकुरण के चरण क्या हैं?
अंकुरण के प्रमुख चरण हैं: जल अवशोषण, भ्रूण की सक्रियता, जड़ का विकास और अंकुर का ऊपर निकलना। यह सभी चरण बीज को एक स्वतंत्र पौधे में बदलने के लिए आवश्यक हैं। - पौधों में बीज किस अंग से बनता है?
पौधों में बीज बीजकला (स्त्री अंग) में बनता है। अंडाणु और परागकण का मिलन जाइगोट बनाता है, जो भ्रूण में विकसित होकर बीज का निर्माण करता है। - बीजकला और परागकोष में अंतर बताइए।
बीजकला स्त्री अंग है जिसमें अंडाणु होता है। परागकोष पुरुष अंग है, जिसमें परागकण बनते हैं। ये दोनों अंग लैंगिक प्रजनन में निषेचन के लिए आवश्यक हैं। - क्रॉस–परागण और स्व–परागण का उदाहरण बताइए।
स्व-परागण: गेहूँ और चावल। क्रॉस-परागण: सूरजमुखी और मटर। स्व-परागण में युग्मक उसी फूल से मिलता है, क्रॉस-परागण में दूसरे फूल से। - लैंगिक प्रजनन का महत्व क्या है?
लैंगिक प्रजनन से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है, जिससे नए जीव पर्यावरणीय परिवर्तनों में अनुकूल बन सकते हैं। यह प्रजाति के विकास और प्राकृतिक चयन में मदद करता है। - अंडज प्राणी के उदाहरण बताइए।
अंडज प्राणी में भ्रूण अंडे में विकसित होता है। उदाहरण: कछुआ, मेंढक, मछली और पक्षी। अंडे में भ्रूण सुरक्षित रहता है और बाहर जन्म लेता है। - जरायुज प्राणी के उदाहरण बताइए।
जरायुज प्राणी में भ्रूण माँ के शरीर में विकसित होता है। उदाहरण: मनुष्य, गाय और कुत्ता। यह आंतरिक निषेचन और संरक्षण के लिए अनुकूल हैं। - बीज में भ्रूण और कोषावरण के अलावा कौन–सी संरचना होती है?
बीज में भ्रूण और कोषावरण के अलावा बीजकोष होता है। बीजकोष बीज को सूखने, चोट और कीट से बचाता है और अंकुरण तक संरचना मजबूत रखता है। - बीजकला का मुख्य कार्य क्या है?
बीजकला स्त्री अंग है जिसमें अंडाणु स्थित होता है। यह निषेचन के बाद बीज में बदल जाता है और नए पौधे के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है। - परागकण का प्रसार कैसे होता है?
परागकण का प्रसार हवा, पानी या कीट द्वारा होता है। यह अन्य फूलों तक पहुँचकर निषेचन करता है और नए बीजों का निर्माण सुनिश्चित करता है। - आंतरिक निषेचन क्यों सुरक्षित है?
आंतरिक निषेचन में युग्मक महिला प्रजनन अंग के भीतर अंडाणु से मिलता है। यह भ्रूण को बाहरी खतरे और शुष्क परिस्थितियों से बचाता है। - बाह्य निषेचन के खतरे क्या हैं?
बाह्य निषेचन में युग्मक शरीर के बाहर मिलते हैं। इसलिए अधिक संख्या में युग्मक और अंडे बनते हैं, क्योंकि कई अंडे और युग्मक नुकसान या शिकार हो सकते हैं। - पौधों में बीज के विकास की प्रक्रिया बताइए।
बीज का विकास अंडाणु और परागकण के मिलन से शुरू होता है। जाइगोट भ्रूण में बदलता है, कोषावरण पोषण देता है और बीजकोष संरचना सुरक्षित रखता है। - बीज के अंकुरण में जड़ का महत्व क्या है?
जड़ पहले विकसित होती है और बीज को जमीन से जोड़ती है। यह पानी और पोषक तत्वों को جذب कर नए पौधे के लिए आधार और पोषण प्रदान करती है। - अलैंगिक प्रजनन में स्पोर का महत्व क्या है?
स्पोर अलैंगिक प्रजनन में नई पीढ़ी का निर्माण करते हैं। यह कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव में विकसित होते हैं। - कली बनना जीवों में क्यों महत्वपूर्ण है?
कली बनना जीवों को तेज़ और सरल तरीके से पुनरुत्पादन की सुविधा देता है। हाइड्रा और यीस्ट जैसे जीव इसी तरीके से नए जीव उत्पन्न करते हैं। - विखंडन के लाभ क्या हैं?
विखंडन में शरीर के टुकड़े स्वतंत्र रूप से नए जीव बनाते हैं। यह अलैंगिक प्रजनन का सरल तरीका है, जो छोटे और कम ऊर्जा वाले जीवों में पाया जाता है। - कायिक प्रजनन किस प्रकार के पौधों में पाया जाता है?
कायिक प्रजनन पौधों में पाया जाता है जहाँ जड़, तना या पत्ती से नए पौधे बनते हैं। उदाहरण: आलू के कंद और गाजर की जड़। - लैंगिक प्रजनन में निषेचन क्यों जरूरी है?
लैंगिक प्रजनन में निषेचन जरूरी है क्योंकि यह पुरुष और स्त्री युग्मक को मिलाकर जाइगोट बनाता है। जाइगोट नए जीव की शुरुआत करता है और प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है।
- बीजकला और परागकोष का मिलन किसे कहते हैं?
बीजकला (स्त्री अंग) और परागकोष (पुरुष अंग) का मिलन निषेचन कहलाता है। इसमें परागकण अंडाणु तक पहुँचकर जाइगोट बनाता है, जो भविष्य में बीज और नए पौधे का निर्माण करता है। - जाइगोट क्या है?
जाइगोट पुरुष और स्त्री युग्मक के मिलन से बनने वाली कोशिका है। यह नए जीव की पहली कोशिका होती है और धीरे-धीरे भ्रूण में विकसित होकर बीज का निर्माण करती है। - पौधों में बीज विकास के लिए कौन से अंग जिम्मेदार हैं?
बीज विकास में बीजकला (अंडाणु), परागकोष (परागकण) और कोषावरण मुख्य भूमिका निभाते हैं। बीजकला निषेचन, कोषावरण पोषण और बीजकोष सुरक्षा प्रदान करता है। - अंडाणु का महत्व क्या है?
अंडाणु स्त्री युग्मक है जो पुरुष युग्मक से मिलकर जाइगोट बनाता है। यह भ्रूण के विकास और नए पौधे के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है। - परागकण का महत्व बताइए।
परागकण पुरुष युग्मक को अंडाणु तक पहुँचाते हैं। यह लैंगिक प्रजनन में आवश्यक है और बीज बनाकर नए पौधे के निर्माण में योगदान करता है। - स्व–परागण और क्रॉस–परागण में मुख्य अंतर क्या है?
स्व-परागण में परागकण उसी फूल के अंडाणु से मिलता है, जबकि क्रॉस-परागण में दूसरे फूल के अंडाणु से मिलता है। क्रॉस-परागण से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। - लैंगिक प्रजनन के मुख्य लाभ क्या हैं?
लैंगिक प्रजनन से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। नई परिस्थितियों में जीव अनुकूल बन सकते हैं और प्रजाति की लंबी उम्र और अस्तित्व सुनिश्चित होता है। - अलैंगिक प्रजनन के लाभ क्या हैं?
अलैंगिक प्रजनन सरल और तेज़ होता है। इसमें केवल एक माता जीव से नए जीव बनते हैं और ऊर्जा कम खर्च होती है। यह छोटे जीवों के लिए उपयुक्त तरीका है। - पौधों में बीज के अंकुरण के लिए किन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है?
बीज के अंकुरण के लिए पर्याप्त जल, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान आवश्यक हैं। ये स्थितियाँ भ्रूण को सक्रिय करती हैं और कोषावरण से पोषण ग्रहण कर विकास संभव बनाती हैं। - बीज में कोषावरण और भ्रूण में क्या संबंध है?
कोषावरण भ्रूण को पोषण देता है। इसमें भंडारित ऊर्जा और आवश्यक तत्व भ्रूण को सक्रिय रखते हैं और अंकुरण तथा नए पौधे के विकास में सहायता करते हैं। - अलैंगिक प्रजनन में स्पोर का उदाहरण क्या है?
कवक और शैवाल में स्पोर बनते हैं। ये स्पोर सूखे और कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव में विकसित होते हैं। - कली बनने का उदाहरण क्या है?
हाइड्रा और यीस्ट में कली बनती है। इसमें माता जीव की दीवार से निकलने वाला छोटा कली धीरे-धीरे विकसित होकर स्वतंत्र जीव बन जाता है। - विखंडन के उदाहरण बताइए।
शैवाल और कुछ प्रोटोजोआ में विखंडन पाया जाता है। इसमें शरीर के टुकड़े अलग होकर स्वतंत्र नए जीव में विकसित होते हैं। - कायिक प्रजनन के उदाहरण बताइए।
पौधों में आलू के कंद और गाजर की जड़ से नए पौधे बनना कायिक प्रजनन है। यह अलैंगिक प्रजनन का सरल और तेज़ तरीका है। - बीजकोष का महत्व बताइए।
बीजकोष बीज को बाहरी खतरे, कीट और सूखने से बचाता है। यह संरचना बीज को सुरक्षित रखती है और अंकुरण तक मजबूत बनाए रखती है। - पौधों में निषेचन के बाद कौन–सी प्रक्रिया होती है?
निषेचन के बाद जाइगोट भ्रूण में विकसित होता है, कोषावरण पोषण देता है और बीजकला बीज का निर्माण करती है। इस प्रक्रिया से नया पौधा बनने के लिए बीज तैयार होता है। - बीज अंकुरण में जड़ का महत्व क्या है?
जड़ सबसे पहले विकसित होती है और जमीन में गहरी पकड़ बनाती है। यह पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित कर पौधे के विकास के लिए आधार और ऊर्जा प्रदान करती है। - पौधों में क्रॉस–परागण का लाभ क्यों होता है?
क्रॉस-परागण से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। इससे पौधे नई परिस्थितियों में अनुकूल बन सकते हैं और प्रजातियों का दीर्घकालिक अस्तित्व सुनिश्चित होता है। - अंडज और जरायुज प्राणी में मुख्य अंतर बताइए।
अंडज प्राणी में भ्रूण अंडे में विकसित होता है और बाहर जन्म लेता है। जरायुज प्राणी में भ्रूण माँ के शरीर में विकसित होता है और जन्म वहीं होता है। - लैंगिक प्रजनन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
लैंगिक प्रजनन का मुख्य उद्देश्य नए जीव का निर्माण, आनुवंशिक विविधता बढ़ाना और प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करना है। यह जीवन चक्र का मुख्य हिस्सा है।
Most VVI Long QuestionAnswer 2026-27
- प्रजनन क्या है और इसका महत्व क्या है?
प्रजनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जीव अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करते हैं। यह प्रजातियों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। प्रजनन के बिना जीवन चक्र रुक जाता है और किसी प्रजाति की संख्या धीरे-धीरे घटने लगती है। इसके माध्यम से जीवन निरंतरता बनाए रखता है, आनुवंशिक विशेषताएँ अगली पीढ़ी तक पहुँचती हैं और नई परिस्थितियों के अनुकूल अनुवांशिक विविधता आती है। प्रजनन दो प्रकार का होता है: अलैंगिक और लैंगिक। अलैंगिक में एक माता से नए जीव बनते हैं, जबकि लैंगिक प्रजनन में दो युग्मक मिलकर नए जीव बनाते हैं। - अलैंगिक और लैंगिक प्रजनन में अंतर और महत्व।
अलैंगिक प्रजनन में केवल एक माता जीव से नए जीव बनते हैं, जो सभी समान होते हैं और आनुवंशिक विविधता नहीं होती। यह तेज़ और सरल होता है। उदाहरण: Amoeba का द्विखंडन। लैंगिक प्रजनन में दो युग्मक (पुरुष और स्त्री) मिलते हैं और जाइगोट बनता है। यह आनुवंशिक विविधता बढ़ाता है, नए परिस्थितियों के अनुकूल जीव पैदा होते हैं, और प्रजातियों का दीर्घकालिक अस्तित्व सुनिश्चित होता है। लैंगिक प्रजनन में समय अधिक लगता है, लेकिन यह प्राकृतिक चयन और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। - द्विखंडन (Binary Fission) और उदाहरण।
द्विखंडन अलैंगिक प्रजनन की सरलतम विधि है, जिसमें जीव की एक कोशिका या संपूर्ण शरीर दो समान हिस्सों में विभाजित हो जाता है। हर भाग स्वतंत्र रूप से नया जीव बनाता है। यह मुख्य रूप से एककोशिकीय प्रोटोजोआ और प्रोकैरियोट्स में पाया जाता है। उदाहरण: Amoeba और Paramecium। द्विखंडन की प्रक्रिया में पहले nucleus विभाजित होता है, फिर cytoplasm और कोशिका झिल्ली दो नए समान जीव बनाती हैं। यह विधि तेज़, सरल और ऊर्जा की दृष्टि से कम खर्चीली होती है। - कली बनना (Budding) और उदाहरण।
कली बनना अलैंगिक प्रजनन का एक तरीका है जिसमें माता जीव की दीवार से एक छोटा कली जैसा अंग निकलता है। यह कली धीरे-धीरे बढ़कर स्वतंत्र जीव बन जाती है। इसमें माता और नई कली अलग दिखाई देती हैं। उदाहरण: हाइड्रा और यीस्ट। इस प्रक्रिया में माता जीव का आकार लगभग समान रहता है, जबकि नई कली धीरे-धीरे विकसित होकर स्वतंत्र हो जाती है। कली बनने की यह प्रक्रिया जीवों को तेज़ी से प्रजनन की क्षमता देती है और अनुकूल परिस्थितियों में तेजी से संख्या बढ़ती है। - विखंडन (Fragmentation) और महत्व।
विखंडन में जीव का शरीर कई टुकड़ों में विभाजित हो जाता है। हर टुकड़ा स्वतंत्र रूप से नए जीव में विकसित होता है। यह शैवाल और कुछ प्रोटोजोआ में सामान्य रूप से पाया जाता है। उदाहरण: Spirogyra। विखंडन अलैंगिक प्रजनन का एक महत्वपूर्ण तरीका है, क्योंकि यह जीवन को तेजी से फैलाने और संख्या बढ़ाने में मदद करता है। हर टुकड़ा मूल जीव की समान विशेषताएँ रखता है और कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने में सक्षम होता है। - स्पोर निर्माण (Spore Formation) और महत्व।
स्पोर निर्माण अलैंगिक प्रजनन की एक विधि है। इसमें विशेष संरचनाएँ बनती हैं जिन्हें स्पोर कहते हैं। ये स्पोर कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव में विकसित हो जाते हैं। उदाहरण: Rhizopus और कवक। स्पोर में पोषण का भंडारण होता है और यह छोटी मात्रा में ऊर्जा खर्च करके जीव को सुरक्षित रखता है। यह प्रजातियों के अस्तित्व और विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। - कायिक प्रजनन (Vegetative Propagation) और उदाहरण।
कायिक प्रजनन में पौधे के अंग जैसे जड़, तना या पत्ती से नए पौधे बनते हैं। यह अलैंगिक प्रजनन का सरल और तेज़ तरीका है। उदाहरण: आलू का कंद, गाजर की जड़ और शतावरी। इस प्रक्रिया में माता पौधे से निकलकर नई पौधों का विकास होता है। यह विधि पौधों के लिए ऊर्जा कम खर्च करती है और जल्दी परिणाम देती है। - लैंगिक प्रजनन के लाभ।
लैंगिक प्रजनन से आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। नए जीव पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूल बनते हैं। यह प्राकृतिक चयन में मदद करता है और प्रजातियों के लंबे समय तक अस्तित्व को सुनिश्चित करता है। लैंगिक प्रजनन से नई पीढ़ियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर विकास सुनिश्चित होता है। - युग्मक क्या है और इसका महत्व।
युग्मक वह विशेष कोशिका है जो लैंगिक प्रजनन में पुरुष और स्त्री जीव से मिलती है। पुरुष युग्मक और स्त्री युग्मक मिलकर जाइगोट बनाते हैं। यह नए जीव की पहली कोशिका होती है और अगले पीढ़ी के लिए आनुवंशिक विशेषताओं का मिश्रण प्रदान करती है। युग्मक की सही मिलन प्रक्रिया प्रजाति के अस्तित्व और विकास के लिए आवश्यक है। - बाह्य निषेचन (External Fertilization) और उदाहरण।
बाह्य निषेचन में पुरुष और स्त्री युग्मक शरीर के बाहर मिलते हैं। यह मुख्य रूप से जलजीवों में पाया जाता है। उदाहरण: मछली और मेंढक। इस प्रक्रिया में अंडे और परागकण पानी में छोड़ दिए जाते हैं, जहाँ निषेचन होता है। बाह्य निषेचन में संख्या अधिक होती है, क्योंकि कई युग्मक मर सकते हैं, लेकिन जीवित रहने वाले नए जीव पर्यावरण के अनुसार विकसित होते हैं।
- आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization) की प्रक्रिया समझाइए।
आंतरिक निषेचन में पुरुष युग्मक स्त्री प्रजनन अंग में पहुँचता है और अंडाणु से मिलता है। यह मुख्य रूप से स्थलीय प्राणियों में पाया जाता है। उदाहरण: मनुष्य, गाय। आंतरिक निषेचन में भ्रूण सुरक्षित रहता है, सूखापन और बाहरी हानिकारक परिस्थितियों से बचता है। निषेचन के बाद जाइगोट बनता है, जो भ्रूण में विकसित होकर नए जीव का निर्माण करता है। यह प्रक्रिया प्रजनन की सफलता बढ़ाती है और प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करती है। - अंडज (Oviparous) और जरायुज (Viviparous) प्राणियों के बीच भिन्नताएँ।
अंडज प्राणी में भ्रूण अंडे के अंदर विकसित होता है और जन्म बाहरी रूप से होता है, उदाहरण: मेंढक, मुर्गा। जरायुज प्राणी में भ्रूण माँ के गर्भ में विकसित होता है और जन्म वहीं होता है, उदाहरण: मनुष्य, बिल्ली। अंडज प्राणी में अधिक संख्या में अंडे होते हैं क्योंकि जीवित रहने का मौका कम होता है। जरायुज में भ्रूण सुरक्षित रहता है और संख्या कम होती है। दोनों विधियाँ प्रजनन के अनुकूल और प्रजातियों के अस्तित्व के लिए अनिवार्य हैं। - बीजकला (Carpel) की संरचना और महत्व।
बीजकला स्त्री पुष्प अंग है जिसमें अंडाशय, शैली और स्तिग्मा शामिल होते हैं। अंडाशय के अंदर अंडाणु होते हैं, जो निषेचन के बाद भ्रूण में विकसित होते हैं। स्तिग्मा परागकण को ग्रहण करता है और शैली उसे अंडाशय तक पहुँचाती है। बीजकला पौधों में लैंगिक प्रजनन के लिए आवश्यक है। यह बीज और नए पौधे के निर्माण की प्रक्रिया सुनिश्चित करता है। बिना बीजकला के पौधे का लैंगिक प्रजनन संभव नहीं है। - परागकोष (Anther) की संरचना और कार्य।
परागकोष पुरुष पुष्प अंग का मुख्य भाग है। इसमें परागकण बनते हैं जो पुरुष युग्मक कोशिकाएँ होते हैं। परागकण हवा, पानी या कीट द्वारा स्त्री अंग तक पहुँचते हैं। यह पौधों में लैंगिक प्रजनन की सफलता सुनिश्चित करता है। परागकोष की संरचना फूल की प्रजनन क्षमता और बीज उत्पादन की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। - स्व–परागण और क्रॉस–परागण में अंतर और लाभ।
स्व-परागण में परागकण उसी फूल के अंडाणु से मिलता है, जिससे आनुवंशिक विविधता कम होती है। क्रॉस-परागण में दूसरे फूल का परागकण अंडाणु से मिलता है, जिससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है। क्रॉस-परागण से पौधे नई परिस्थितियों के अनुकूल विकसित होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। स्व-परागण में ऊर्जा कम खर्च होती है, लेकिन क्रॉस-परागण अधिक लाभकारी होता है। - परागण (Pollination) के प्रकार और महत्व।
परागण वह प्रक्रिया है जिसमें परागकण स्त्री अंग तक पहुँचता है। यह दो प्रकार का होता है: स्व-परागण और क्रॉस-परागण। स्व-परागण में फूल स्वयं निषेचन करता है, जबकि क्रॉस-परागण में परागकण दूसरे फूल से आता है। परागण बीज बनने और पौधों में आनुवंशिक विविधता के लिए आवश्यक है। यह प्राकृतिक चयन और प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व में मदद करता है। - निषेचन (Fertilization) क्या है और प्रक्रिया।
निषेचन पुरुष और स्त्री युग्मक के मिलन की प्रक्रिया है। पुरुष युग्मक परागकण से अंडाणु तक पहुँचता है, जिससे जाइगोट बनता है। जाइगोट भ्रूण में विकसित होता है और बीज बनाता है। निषेचन पौधों और जानवरों में नए जीव की शुरुआत करता है। यह आनुवंशिक विशेषताओं को अगली पीढ़ी में ले जाता है और प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है। - जाइगोट (Zygote) क्या है और महत्व।
जाइगोट पुरुष और स्त्री युग्मक के मिलन से बनती है। यह नए जीव की पहली कोशिका है। जाइगोट विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करती है, जो बाद में स्वतंत्र जीव बनता है। यह आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करता है और प्रजातियों के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। जैविक विकास की श्रृंखला में जाइगोट का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। - बीज का निर्माण और संरचना।
बीज निषेचन के बाद बनता है। इसमें भ्रूण, कोषावरण और बीजकोष शामिल होते हैं। भ्रूण नए पौधे का निर्माण करता है, कोषावरण पोषण देता है और बीजकोष सुरक्षा प्रदान करता है। बीज पौधे के जीवन चक्र को जारी रखता है और नए पौधे की वृद्धि सुनिश्चित करता है। यह पौधों के प्रजनन और प्रजातियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। - अंकुरण (Germination) की प्रक्रिया और आवश्यकताएँ।
अंकुरण वह प्रक्रिया है जिसमें बीज से नया पौधा विकसित होता है। इसके लिए पानी, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान आवश्यक हैं। पानी बीज को फुलाता है, ऑक्सीजन ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक है और तापमान भ्रूण को सक्रिय करता है। अंकुरण में पहले जड़ विकसित होती है, फिर अंकुर बाहर निकलता है। यह नए पौधे के विकास और जीवन चक्र के लिए अनिवार्य है। - बीज में भ्रूण और कोषावरण का संबंध।
बीज में भ्रूण वह संरचना है जिससे नया पौधा विकसित होता है, जबकि कोषावरण पोषण का भंडार होता है। भ्रूण को कोषावरण में मौजूद प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा की सहायता मिलती है। ये पोषक तत्व अंकुरण और प्रारंभिक विकास के लिए आवश्यक होते हैं। बीज के अंकुरित होने पर जड़ और अंकुर को पोषण मिलता है। इस प्रकार भ्रूण और कोषावरण का संबंध आपसी निर्भरता पर आधारित है। कोषावरण भ्रूण की वृद्धि सुनिश्चित करता है और नए पौधे के विकास में मुख्य भूमिका निभाता है। - अंकुरण के चरण।
अंकुरण प्रक्रिया में सबसे पहले बीज पानी अवशोषित करता है और फुलता है। इसके बाद भ्रूण सक्रिय होता है और कोशिकाएँ विभाजित होने लगती हैं। जड़ सबसे पहले बीज से बाहर निकलती है, जो जमीन में पकड़ बनाती है और पानी तथा पोषक तत्व अवशोषित करती है। फिर अंकुर ऊपर निकलता है और पत्तियाँ विकसित होती हैं। अंतिम चरण में नया पौधा पूरी तरह से स्वतंत्र हो जाता है। यह प्रक्रिया बीज को पौधे में बदलने और जीवन चक्र को जारी रखने के लिए आवश्यक है। - अलैंगिक प्रजनन में स्पोर का महत्व।
स्पोर अलैंगिक प्रजनन में विशेष संरचनाएँ होती हैं। ये कठिन परिस्थितियों में जीव को सुरक्षित रखते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव में विकसित हो जाते हैं। स्पोर में पोषण भंडारित होता है और यह ऊर्जा कम खर्च करके जीव की संख्या बढ़ाने में मदद करता है। उदाहरण: कवक और Rhizopus। स्पोर निर्माण विधि प्रजातियों के अस्तित्व और तेजी से फैलाव के लिए महत्वपूर्ण है। यह जीवों को अनुकूल परिस्थितियों में तेजी से पुनरुत्पादन की क्षमता देता है। - कली बनने का महत्व।
कली बनना अलैंगिक प्रजनन की एक विधि है जिसमें माता जीव से एक छोटा कली जैसा अंग निकलता है। यह धीरे-धीरे विकसित होकर स्वतंत्र जीव बन जाता है। उदाहरण: हाइड्रा। इस प्रक्रिया से माता जीव अपनी संरचना बनाए रखता है और नई पीढ़ी जल्दी उत्पन्न होती है। कली बनना ऊर्जा की दृष्टि से कुशल तरीका है और यह जीवों को तेज़ी से संख्या बढ़ाने में मदद करता है। - विखंडन (Fragmentation) के लाभ।
विखंडन में जीव का शरीर कई टुकड़ों में विभाजित हो जाता है और हर टुकड़ा नए जीव में विकसित होता है। यह विधि शैवाल और कुछ प्रोटोजोआ में सामान्य है। विखंडन अलैंगिक प्रजनन का सरल और तेज़ तरीका है। यह जीवों को कम ऊर्जा में अधिक संख्या में नए जीव उत्पन्न करने की क्षमता देता है। कठिन परिस्थितियों में भी यह विधि प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने में सहायक होती है। - कायिक प्रजनन के उदाहरण और महत्व।
कायिक प्रजनन में पौधे के अंग जैसे जड़, तना या पत्ती से नए पौधे बनते हैं। उदाहरण: आलू का कंद, गाजर की जड़। यह विधि अलैंगिक प्रजनन का सरल और तेज़ तरीका है। इसके माध्यम से पौधे कम समय और ऊर्जा में नए पौधे पैदा कर सकते हैं। यह खेती और वनस्पति प्रजनन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। - लैंगिक प्रजनन में निषेचन का महत्व।
लैंगिक प्रजनन में निषेचन पुरुष और स्त्री युग्मक के मिलन से होता है। यह जाइगोट का निर्माण करता है, जो भ्रूण में विकसित होकर नए जीव बनता है। निषेचन आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करता है और प्रजातियों को अनुकूल परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करता है। यह प्राकृतिक चयन और विकास की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। - बीजकला और परागकोष के मिलन से क्या बनता है।
बीजकला (स्त्री अंग) और परागकोष (पुरुष अंग) के मिलन से जाइगोट बनता है। जाइगोट भ्रूण में विकसित होता है और बाद में बीज बनाता है। यह प्रक्रिया पौधों में लैंगिक प्रजनन सुनिश्चित करती है और नए पौधे के निर्माण के लिए आवश्यक है। इस प्रकार बीजकला और परागकोष का सहयोग प्रजाति के अस्तित्व और आनुवंशिक विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। - बीज के प्रमुख भाग और उनकी भूमिका। बीज में मुख्य भाग हैं: भ्रूण, कोषावरण और बीजकोष। भ्रूण नए पौधे का निर्माण करता है, कोषावरण पोषण का भंडार होता है और बीजकोष बीज को सूखने, कीट और बाहरी नुकसान से बचाता है। भ्रूण को कोषावरण से पोषण मिलता है और बीज अंकुरित होकर नया पौधा बनता है। यह संरचना पौधों के जीवन चक्र और प्रजाति के अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- अंकुरण (Germination) के लिए आवश्यक स्थितियाँ और महत्व।
बीज के अंकुरण के लिए पानी, ऑक्सीजन और उपयुक्त तापमान आवश्यक हैं। पानी बीज को फुलाता है, ऑक्सीजन ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है और तापमान भ्रूण को सक्रिय करता है। अंकुरण में पहले जड़ जमीन में प्रवेश करती है, फिर अंकुर ऊपर निकलता है और पत्तियाँ विकसित होती हैं। यह प्रक्रिया नए पौधे के विकास और जीवन चक्र को जारी रखने के लिए अनिवार्य है।
अध्याय 1: जीवों में प्रजनन – Top 30 सवाल (Home Work)
- लैंगिक और अलैंगिक प्रजनन में मुख्य अंतर लिखिए।
- अलैंगिक प्रजनन के फायदे बताइए।
- कली बनना क्या है? उदाहरण लिखिए।
- विखंडन किसे कहते हैं? इसका महत्व बताइए।
- स्पोर क्या होता है और इसका क्या कार्य है?
- कायिक प्रजनन किसे कहते हैं? उदाहरण लिखिए।
- बीज और अंकुरण के बीच अंतर बताइए।
- बीज के मुख्य भाग कौन-कौन से होते हैं?
- कोषावरण और बीजकोष का महत्व लिखिए।
- बीज अंकुरित होने के लिए किन कारकों की आवश्यकता होती है?
- जड़ और अंकुर का विकास क्रम बताइए।
- स्व-परागण और क्रॉस-परागण में अंतर लिखिए।
- परागण क्या है? इसके माध्यम क्या हो सकते हैं?
- परागकण और अंडाणु क्या हैं?
- निषेचन क्या होता है? प्रक्रिया समझाइए।
- जाइगोट किसे कहते हैं? इसका महत्व बताइए।
- भ्रूण का विकास क्रम लिखिए।
- अंडज और जरायुज प्राणियों में क्या अंतर है?
- अंडज प्राणियों के उदाहरण लिखिए।
- जरायुज प्राणियों के उदाहरण लिखिए।
- अंडज प्राणी के विकास पर पर्यावरण का प्रभाव बताइए।
- जरायुज प्राणी में आंतरिक विकास का महत्व समझाइए।
- बीज का प्रसार किस प्रकार हो सकता है?
- हवा, पानी और जानवरों द्वारा बीज प्रसार का उदाहरण दीजिए।
- मानव गतिविधियों से बीज प्रसार कैसे होता है?
- फूल का लैंगिक प्रजनन में क्या महत्व है?
- नर पुष्प अंग (Stamen) के भाग लिखिए और महत्व बताइए।
- स्त्री पुष्प अंग (Carpel / Pistil) के भाग लिखिए और महत्व बताइए।
- लैंगिक प्रजनन से आनुवंशिक विविधता कैसे बढ़ती है?
- अंकुरण का महत्व और प्रक्रिया संक्षेप में लिखिए।
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